पटना मेट्रो को मिलेगी नई रफ्तार: 102 कोच, 27 ट्रेनसेट और 32.5 किमी का नेटवर्क, बिहार सरकार के मेट्रो मिशन में बड़ा कदम!

DMRC ने पटना मेट्रो के लिए 102 स्टैंडर्ड गेज मेट्रो कारों की अंतरराष्ट्रीय निविदा निकाली है। 27 ट्रेनसेट, 32.5 किमी नेटवर्क, GoA2 ऑटोमेशन, 35 साल की डिजाइन आयु और बिहार सरकार की भूमिका, पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

पटना मेट्रो की ट्रेन और 102 मेट्रो कारों, 27 ट्रेनसेट व 32.5 किमी कॉरिडोर की जानकारी वाला ग्राफिक
DMRC ने PMRCL की ओर से पटना मेट्रो के कॉरिडोर 1 और 2 के लिए 102 मेट्रो कारों की निविदा आमंत्रित की

पटना मेट्रो को मिलेगी नई रफ्तार: 102 कोच, 27 ट्रेनसेट और 32.5 किमी का नेटवर्क

पटना: राजधानी पटना की पहली मेट्रो परियोजना अब उस चरण में पहुँच रही है जहाँ पटरियों और स्टेशनों के साथ गाड़ियों की तैयारी भी तेज हो रही है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (PMRCL) की ओर से कॉरिडोर 1 और कॉरिडोर 2 के लिए 102 स्टैंडर्ड गेज मेट्रो कारों की डिजाइन, निर्माण, आपूर्ति, परीक्षण और कमीशनिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी निविदा आमंत्रित की है। ये 102 कारें कुल 27 ट्रेनसेट में बँटेंगी। बिहार सरकार के लिए यह राजधानी के शहरी परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम पड़ाव है।

इस रिपोर्ट में क्या है (एक नज़र में)

  • फ्लीट: 102 कारें, 27 ट्रेनसेट (20 तीन-कोच और 7 छह-कोच)
  • नेटवर्क: कॉरिडोर 1 (17.93 किमी) और कॉरिडोर 2 (14.57 किमी), कुल 32.50 किमी
  • तकनीक: 90 किमी प्रति घंटा डिजाइन स्पीड, GoA2 ऑटोमेशन, CBTC संगत, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग
  • बिहार सरकार की भूमिका: PMRCL, मंत्रिमंडल की मंजूरियाँ, JICA ऋण, मुख्यमंत्री की समीक्षा और 2 जुलाई का विस्तार उद्घाटन
  • आगे: पुणे से पट्टे पर ट्रेनें, AFC, E&M और ट्रैक की अन्य निविदाएँ

क्या है पूरी खबर?

निविदा दस्तावेज़ के अनुसार पटना मेट्रो के दोनों कॉरिडोर के लिए कुल 102 मेट्रो कारें खरीदी जानी हैं। इनमें 20 ट्रेनसेट तीन कोच वाले होंगे और 7 ट्रेनसेट छह कोच वाले। हिसाब सीधा है: 20 × 3 = 60 कारें और 7 × 6 = 42 कारें, यानी कुल 102।

यह निविदा केवल ट्रेन खरीदने की प्रक्रिया नहीं है। इसमें गाड़ियों का डिजाइन, निर्माण, पटना तक आपूर्ति, परीक्षण और कमीशनिंग शामिल है। यानी चुनी गई कंपनी को पूरी जिम्मेदारी निभानी होगी। मेट्रो की भाषा में इसे रोलिंग स्टॉक पैकेज कहा जाता है। किसी भी मेट्रो परियोजना में यह सबसे महत्वपूर्ण और महँगे पैकेजों में गिना जाता है, क्योंकि स्टेशन और पटरी तैयार होने के बाद भी ट्रेन के बिना सेवा शुरू नहीं हो सकती।

फ्लीट एक नज़र में

विवरणजानकारीकुल मेट्रो कारें102कुल ट्रेनसेट27तीन कोच वाले ट्रेनसेट20छह कोच वाले ट्रेनसेट7कॉरिडोर 1दानापुर से खेमनी चक, 17.93 किमीकॉरिडोर 2पटना स्टेशन से पाटलिपुत्र बस टर्मिनल, 14.57 किमीकुल लंबाई32.50 किमी (18.59 किमी भूमिगत, 13.91 किमी एलिवेटेड/एट-ग्रेड)डिजाइन स्पीड90 किमी प्रति घंटाअधिकतम परिचालन गति80 किमी प्रति घंटाट्रैक्शन पावर25 kV AC, सिंगल फेज, 50 Hzकार बॉडी की डिजाइन आयु35 वर्षवार्षिक डिजाइन रनिंग दूरीप्रति ट्रेन 1,50,000 किमीट्रेन कंट्रोलGoA2 ऑटोमेशन, CBTC आधारित ATP/ATO संगतप्रणोदनVVVF नियंत्रण, तीन फेज इंडक्शन मोटरब्रेकिंगरीजेनरेटिव, सर्विस और इमरजेंसी ब्रेक

दोनों कॉरिडोर: पटना की नई जीवनरेखा

कॉरिडोर 1 (रेड लाइन) दानापुर से खेमनी चक तक जाती है और इसकी लंबाई 17.93 किमी है। यह पूर्व-पश्चिम दिशा में शहर को जोड़ने वाली लाइन है। इसका बड़ा हिस्सा बेली रोड जैसे व्यस्त इलाकों से गुजरता है, जहाँ भूमिगत निर्माण हो रहा है।

कॉरिडोर 2 (ब्लू लाइन) पटना स्टेशन से पाटलिपुत्र बस टर्मिनल (न्यू ISBT) तक है और इसकी लंबाई 14.57 किमी है। यह उत्तर-दक्षिण दिशा में चलती है। इस लाइन के कुछ हिस्से भूमिगत हैं, जिनमें पटना जंक्शन, गांधी मैदान और राजेंद्र नगर जैसे इलाके आते हैं।

दोनों कॉरिडोर मिलाकर 32.50 किमी का नेटवर्क बनता है, जिसमें 18.59 किमी भूमिगत और 13.91 किमी एलिवेटेड या एट-ग्रेड हिस्सा है। पूरे नेटवर्क पर 24 स्टेशन प्रस्तावित हैं, और पटना जंक्शन तथा खेमनी चक पर दोनों लाइनों का इंटरचेंज होगा। पूरा प्रस्तावित नेटवर्क 32.5 किमी और 24 स्टेशनों का बताया गया है।

भूमिगत हिस्से का इतना बड़ा अनुपात बताता है कि यह परियोजना तकनीकी रूप से कितनी चुनौतीपूर्ण है। घनी आबादी और संकरी सड़कों वाले शहर में जमीन के नीचे मेट्रो चलाना ही सबसे व्यावहारिक विकल्प है, लेकिन इसके लिए आधुनिक और भरोसेमंद ट्रेनों की जरूरत होती है।

नई ट्रेनें कैसी होंगी?

निविदा में बताई गई तकनीकी विशेषताएँ बताती हैं कि पटना को आधुनिक मेट्रो मानकों वाली ट्रेनें मिलने वाली हैं।

रफ्तार और बिजली: ट्रेनों की डिजाइन स्पीड 90 किमी प्रति घंटा है, जबकि शहर के भीतर अधिकतम परिचालन गति 80 किमी प्रति घंटा रहेगी। ये ट्रेनें 25 kV AC, सिंगल फेज, 50 Hz की ओवरहेड बिजली पर चलेंगी, जो देश की ज्यादातर आधुनिक मेट्रो प्रणालियों में अपनाया गया मानक है।

ऑटोमेशन: ट्रेन कंट्रोल के लिए GoA2 स्तर का ऑटोमेशन रखा गया है, जिसमें ट्रेन स्वचालित रूप से चलती और रुकती है, जबकि चालक निगरानी और सुरक्षा के लिए मौजूद रहता है। साथ ही ट्रेनें CBTC (कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल) आधारित ATP/ATO प्रणाली के अनुकूल होंगी। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर कम रखा जा सकता है और सुरक्षित तरीके से ज्यादा फेरे चलाए जा सकते हैं।

प्रणोदन और ब्रेकिंग: VVVF नियंत्रण वाली तीन फेज इंडक्शन मोटरें ऊर्जा कुशल मानी जाती हैं। ब्रेकिंग में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग के साथ सर्विस ब्रेक और इमरजेंसी ब्रेक की व्यवस्था है। रीजेनरेटिव ब्रेकिंग में ट्रेन रुकते समय बिजली को वापस सिस्टम में लौटा देती है, जिससे ऊर्जा की बचत होती है।

लंबी उम्र: कार बॉडी की डिजाइन आयु 35 वर्ष तय की गई है और हर ट्रेन के लिए सालाना डिजाइन रनिंग दूरी 1,50,000 किमी रखी गई है। यानी ये गाड़ियाँ दशकों तक पटना की सेवा के लिए बनाई जा रही हैं।

यात्री सुविधाएँ: ट्रेनों में एयर कंडीशनिंग, यात्री सूचना और घोषणा प्रणाली, CCTV निगरानी, यात्री अलार्म, स्वचालित दरवाजे, ट्रेन कंट्रोल एंड मॉनिटरिंग सिस्टम और ऑनबोर्ड डायग्नोस्टिक्स होंगे। CCTV और यात्री अलार्म सुरक्षा के लिहाज से खासतौर पर अहम हैं, क्योंकि महिलाओं, बुजुर्गों और विद्यार्थियों समेत हर वर्ग के यात्रियों का भरोसा इसी पर टिकता है।

बिहार सरकार से इसका क्या संबंध है?

पटना मेट्रो बिहार सरकार की अपनी परियोजना है, और इस निविदा को समझने के लिए पूरी तस्वीर देखना जरूरी है।

1. परियोजना की मालिक बिहार सरकार की कंपनी है। पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (PMRCL) एक सार्वजनिक कंपनी है, जिसका गठन बिहार सरकार ने किया। PMRCL को 18 फरवरी 2019 को एक असूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी के रूप में स्थापित किया गया। DMRC इस परियोजना में निर्माण एजेंसी और सलाहकार की भूमिका निभा रहा है, जबकि स्वामित्व और संचालन की जिम्मेदारी राज्य की कंपनी की है। इसीलिए इस निविदा में DMRC ने PMRCL की ओर से बोलियाँ आमंत्रित की हैं।

2. परियोजना की शुरुआत राज्य मंत्रिमंडल के फैसलों से हुई। बिहार मंत्रिमंडल ने 11 जून 2013 को पटना में मेट्रो सेवा के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का प्रस्ताव मंजूर किया था। इसके बाद कई चरणों में डिजाइन, मंजूरी और वित्त की प्रक्रिया पूरी हुई। यह परियोजना लंबे समय में अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में आगे बढ़ी है, और अब वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इसका संचालन चरण शुरू हो चुका है और विस्तार जारी है।

3. वित्त का बड़ा हिस्सा जापानी सहायता से आता है। जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) ने पटना मेट्रो के पहले चरण के लिए 98,612 मिलियन येन, यानी करीब 5,509 करोड़ रुपये का ऋण समझौता किया, और परियोजना की अनुमानित लागत 13,365.77 करोड़ रुपये है। इस ऋण की अदायगी अवधि 30 वर्ष और ग्रेस पीरियड 10 वर्ष है। रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग का पैकेज इसी JICA वित्त पोषण से जुड़ा बताया जाता रहा है, और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली की प्रक्रिया इसी कारण अपनाई जा रही है।

4. राज्य सरकार की भूमिका निगरानी और फैसलों में है। परियोजना में जमीन, मंजूरी, ट्रैफिक प्रबंधन, राज्य के हिस्से का धन और विभागीय समन्वय जैसे काम राज्य सरकार के जिम्मे हैं। शहरी विकास एवं आवास विभाग इस पूरे काम की नोडल एजेंसी की भूमिका में है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सक्रियता

वर्तमान सरकार के कार्यकाल में पटना मेट्रो की निगरानी लगातार हुई है।

29 जून की समीक्षा बैठक: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोक सेवक आवास में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें निर्माण की रफ्तार परखी गई और अधिकारियों को हर चरण तय समय में तथा उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने का निर्देश दिया गया। मुख्यमंत्री ने यह भी साफ कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और अलग-अलग जगहों पर काम एक साथ कराने को कहा।

जनता को कम परेशानी: बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्माण स्थलों के आसपास वैज्ञानिक ट्रैफिक प्रबंधन का निर्देश दिया। उन्होंने पटना के ट्रैफिक नेटवर्क के व्यापक आकलन की बात भी कही, ताकि जाम से निपटने की दीर्घकालिक रणनीति बन सके। बेली रोड पर भूमिगत निर्माण के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी राज्य सरकार ने अधिकारियों को विस्तृत योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।

सैटेलाइट टाउनशिप: मुख्यमंत्री ने पटना के प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप का मास्टर प्लान तय समय में तैयार करने को भी कहा। मेट्रो और नई टाउनशिप साथ जुड़ें तो शहर का दबाव कम करने की बड़ी तस्वीर बनती है।

2 जुलाई: मलाही पकड़ी तक विस्तार: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार, 2 जुलाई को मलाही पकड़ी तक पटना मेट्रो सेवा के विस्तार का उद्घाटन किया, जिससे चालू कॉरिडोर की लंबाई लगभग दोगुनी हो गई। विस्तार से पहले मेट्रो भूतनाथ और ISBT के बीच के छोटे हिस्से पर चल रही थी, और अब चालू नेटवर्क 6.2 किमी का है। मुख्यमंत्री ने स्टेशन का उद्घाटन किया और मलाही पकड़ी से भूतनाथ तक नए खुले हिस्से में सफर भी किया। उनके साथ उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव मौजूद थे।

यह तथ्य निविदा की खबर से सीधे जुड़ता है। चालू हिस्से का दायरा बढ़ेगा तो ट्रेनों की जरूरत भी बढ़ेगी। 102 कारों का यह पैकेज उसी बढ़ती जरूरत की स्थायी तैयारी है।

अभी कौन सी ट्रेनें चल रही हैं?

एक स्वाभाविक सवाल है कि जब नई ट्रेनों की निविदा अभी चल रही है, तो फिलहाल मेट्रो कैसे चल रही है? जवाब है पट्टे पर लिए गए रेक। पटना में चल रही तीन कोच वाली ट्रेन तीन साल के लिए पुणे मेट्रो से पट्टे पर ली गई है, और 2025 के मध्य में बिहार मंत्रिमंडल ने इसके लिए 21.15 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी।

आगे पुणे से तीन और ट्रेनें दिसंबर 2026 तक आने की बात है, जो छह कोच की होंगी और प्रति ट्रेन क्षमता लगभग दोगुनी कर देंगी। इनका कुल पट्टा खर्च करीब 63 करोड़ रुपये बताया गया है। इन्हें एलिवेटेड कॉरिडोर 1 पर चलाने की योजना है। यानी राज्य सरकार ने अस्थायी इंतजाम से सेवा शुरू की, और अब स्थायी, पूरे नेटवर्क के लिए बनी ट्रेनों की खरीद की ओर बढ़ रही है।

इस निविदा का यह भी मतलब है कि पटना को अपनी जरूरत के हिसाब से डिजाइन की गई ट्रेनें मिलेंगी, जो भूमिगत और एलिवेटेड दोनों खंडों के लिए उपयुक्त हों और पूरे नेटवर्क के सिग्नलिंग व कंट्रोल सिस्टम से तालमेल रखें।

पूरे प्रोजेक्ट में और कौन से काम चल रहे हैं?

ट्रेन की निविदा अकेली नहीं है। हाल के महीनों में DMRC ने पटना मेट्रो से जुड़े कई और पैकेज निकाले हैं, जो बताते हैं कि काम कई मोर्चों पर साथ-साथ चल रहा है:

  • AFC सिस्टम: 24 स्टेशनों के लिए स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली की 114.24 करोड़ रुपये की निविदा निकाली गई।
  • भूमिगत स्टेशनों का E&M काम: कॉरिडोर 2 के भूमिगत स्टेशनों के इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल कार्य के लिए करीब 327.96 करोड़ रुपये की निविदा जारी हुई, जिसकी अवधि 24 महीने है।
  • बैलास्टलेस ट्रैक: मिठापुर से खेमनी चक के एलिवेटेड हिस्से में बैलास्टलेस ट्रैक बिछाने के लिए 16.92 करोड़ रुपये की निविदा निकली, जिसकी अवधि 8 महीने है।
  • स्टेशनों की फिनिशिंग: सात एलिवेटेड स्टेशनों के PEB कार्य और मिठापुर, रामकृष्ण नगर तथा जगनपुरा स्टेशनों की वास्तुशिल्पीय फिनिशिंग के लिए करीब 52.02 करोड़ रुपये की निविदा निकाली गई।

इन सबके साथ 102 कारों का पैकेज जुड़ने से तस्वीर पूरी होती है। स्टेशन, पटरी, बिजली, टिकटिंग और ट्रेन, सब मिलकर ही एक काम करने वाली मेट्रो बनाते हैं।

पटनावासियों के लिए इसके मायने

जाम से राहत की उम्मीद: पटना की सड़कें दोपहिया और चारपहिया वाहनों के बोझ से जूझती रही हैं। मेट्रो का उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता घटाना है। मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि चालू होने पर मेट्रो सुरक्षित, तेज और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन देगी, सड़कों का दबाव और प्रदूषण घटाएगी।

ज्यादा फेरे, कम इंतजार: मेट्रो की सफलता इस पर टिकती है कि ट्रेन कितनी बार आती है। 27 ट्रेनसेट का बेड़ा और CBTC जैसी आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था पीक आवर्स में कम अंतराल पर ट्रेनें चलाने की क्षमता देती है। यही वह चीज है जिसकी आम यात्री सबसे ज्यादा माँग करते हैं।

दो तरह की क्षमता: तीन कोच और छह कोच के ट्रेनसेट का मिश्रण सेवा को मांग के अनुसार ढालने की सुविधा देता है। कम भीड़ वाले समय में छोटे सेट और व्यस्त समय में लंबे सेट चलाए जा सकते हैं।

सुरक्षा और सुविधा: CCTV, यात्री अलार्म, स्वचालित दरवाजे और एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएँ पहली बार मेट्रो में सफर करने वालों के लिए भी भरोसे की बात हैं।

रोजगार और उद्योग को बढ़ावा: मेट्रो परियोजना में निर्माण, रखरखाव, संचालन और तकनीकी सेवाओं के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार बनते हैं। ट्रेन निर्माण से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला भी सक्रिय होती है।

पर्यावरण: रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और बिजली से चलने वाली ट्रेनें प्रदूषण घटाने की दिशा में मदद करती हैं।

आगे क्या होगा?

निविदा प्रक्रिया के सामान्य चरण होते हैं: बोलियाँ जमा होना, तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय बोली खुलना, सबसे योग्य बोलीदाता का चयन, अनुबंध और फिर निर्माण व आपूर्ति। अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली होने से देश-विदेश की कई कंपनियाँ हिस्सा ले सकती हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और अच्छी गुणवत्ता व उचित कीमत की संभावना बनती है।

समय-सीमा निविदा की शर्तों और अनुबंध से तय होगी। JICA वित्त पोषण से जुड़ी परियोजना के लिए शुरुआती लक्ष्य दोनों लाइनों को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का रखा गया था। आने वाले महीनों में देखने लायक बातें ये होंगी:

  • निविदा में कितनी कंपनियाँ बोली लगाती हैं
  • चयनित कंपनी कौन सी होती है और अनुबंध कब होता है
  • ट्रेनों की पहली डिलीवरी की समय-सीमा क्या तय होती है
  • भूमिगत हिस्सों के निर्माण और ट्रेनों की आपूर्ति में कितना तालमेल बैठता है
  • पुणे से पट्टे पर आने वाली अतिरिक्त ट्रेनें तय समय पर पहुँचती हैं या नहीं

जनता के लिए जरूरी बातें

किसी भी बड़ी परियोजना की तरह इसमें भी कुछ बातें साफ समझ लेना जरूरी है। यह खबर निविदा आमंत्रित होने की है, यानी ट्रेनें अभी खरीदी नहीं गई हैं और ठेका किसी कंपनी को दिया नहीं गया है। निर्माण से लेकर पटना में आपूर्ति तक का काम आगे होगा। मेट्रो का पूरा नेटवर्क चालू होने में अभी समय लगेगा, और चालू हिस्सा अभी सीमित है।

इसलिए जागरूक नागरिक के तौर पर यह देखना उचित होगा कि निविदा प्रक्रिया पारदर्शी रहे, समय-सीमा का पालन हो और निर्माण के दौरान आम लोगों को कम से कम असुविधा हो। सरकार की ओर से ट्रैफिक प्रबंधन योजना और नियमित समीक्षा इसी दिशा में कदम हैं।

102 मेट्रो कारों की निविदा बताती है कि पटना मेट्रो अब सिर्फ निर्माण स्थलों और बैरिकेडिंग की कहानी नहीं रही। यह एक ऐसी परियोजना बन रही है जिसमें ट्रेनें, तकनीक और सेवा की तैयारी भी जुड़ रही है। 20 तीन-कोच और 7 छह-कोच ट्रेनसेट, 32.5 किमी का नेटवर्क, 35 साल की डिजाइन आयु और GoA2 ऑटोमेशन वाली ये गाड़ियाँ पटना के शहरी परिवहन का चेहरा बदलने की क्षमता रखती हैं।

बिहार सरकार की भूमिका इसमें PMRCL के जरिए स्वामित्व, मंत्रिमंडल की मंजूरियों, पट्टे पर ट्रेनों की व्यवस्था, मुख्यमंत्री स्तर की नियमित समीक्षा और 2 जुलाई के विस्तार उद्घाटन तक दिखाई देती है। अब असली परीक्षा समय पर और गुणवत्ता के साथ काम पूरा करने की है। जब पटना के लोग गांधी मैदान से पाटलिपुत्र तक और दानापुर से खेमनी चक तक मेट्रो में सफर करेंगे, तब यही निविदा उस सपने की ठोस नींव साबित होगी।

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