बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला: 30 प्रस्तावों को मंजूरी, हरित हाइड्रोजन नीति और सौर ऊर्जा को मिला बढ़ावा

बिहार कैबिनेट ने हरित हाइड्रोजन नीति, कृषि फीडरों के सोलराइजेशन, हीमोफीलिया योजना, सड़क चौड़ीकरण और पुलिस बल सुदृढ़ीकरण समेत 30 बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी। जानें सभी फैसलों की पूरी जानकारी।

बिहार मंत्रिमंडल परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में अधिकारी मौजूद
30 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल परिषद की बैठक में ऊर्जा, स्वास्थ्य, सड़क और पुलिस सुदृढ़ीकरण से जुड़े 30 प्रस्तावों को मंजूरी मिली

पटना, 30 सितंबर 2026: बिहार सरकार की मंत्रिमंडल परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें राज्य के विकास, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सुविधाओं और कानून-व्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से कुल 30 प्रमुख प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। इस बैठक में लिए गए फैसले ऊर्जा से लेकर सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और सामाजिक कल्याण तक, कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर करते हैं। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से राज्य के आर्थिक विकास के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

आइए विभागवार विस्तार से जानते हैं इस कैबिनेट बैठक में लिए गए सभी महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में।

ऊर्जा विभाग: हरित ऊर्जा और सौर क्रांति की दिशा में बड़ा कदम

इस कैबिनेट बैठक में सबसे ज्यादा ध्यान ऊर्जा क्षेत्र पर केंद्रित रहा, जहां राज्य सरकार ने स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी फैसले लिए।

बिहार हरित हाइड्रोजन नीति, 2026

राज्य में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 'बिहार हरित हाइड्रोजन नीति, 2026' के प्रारूप को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। हरित हाइड्रोजन को भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में देखा जा रहा है, जो जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस नीति के जरिए बिहार सरकार राज्य में हरित हाइड्रोजन उत्पादन से जुड़े उद्योगों और निवेश को आकर्षित करने की दिशा में काम करेगी, जिससे न सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

कृषि फीडरों का बड़े पैमाने पर सोलराइजेशन

किसानों को सस्ती और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 2,554 कृषि फीडरों के सोलराइजेशन को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत कुल 2,585 मेगावॉट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इस परियोजना के लिए अनुदान राशि के रूप में 2,714.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहित करने के लिए 47.30 करोड़ रुपये की अलग से व्यवस्था की गई है, जिससे इस परियोजना की कुल लागत 2,761.55 करोड़ रुपये हो जाती है।

इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसानों को दिन के समय सिंचाई के लिए भरोसेमंद और सस्ती बिजली मिल सकेगी, जिससे कृषि उत्पादकता में सुधार आने की उम्मीद है। साथ ही, सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन होने से पारंपरिक बिजली ग्रिड पर दबाव भी कम होगा।

21,644 घरों तक पहुंचेगी बिजली

विद्युतीकरण के क्षेत्र में भी सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के तहत कैमूर और रोहतास जिलों के 177 बसावटों, जो कुल 132 गांवों में फैले हैं, के 21,644 घरों को बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए 'पुनरुत्थान वितरण क्षेत्र योजना' (RDSS) के तहत 351.85 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित लागत को मंजूरी दी गई है। यह परियोजना उन क्षेत्रों में बिजली की पहुंच सुनिश्चित करेगी, जहां अभी तक लोगों को बिजली सुविधा से वंचित रहना पड़ता था।

स्वास्थ्य विभाग: हीमोफीलिया मरीजों के लिए बड़ी राहत

स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार ने हीमोफीलिया से पीड़ित मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना को मंजूरी दी है। 'मुख्यमंत्री हीमोफीलिया योजना' के तहत हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों के बेहतर इलाज के लिए Non-Factor दवा, जिसे Emicizumab कहा जाता है, की खरीद के लिए प्रथम वर्ष में कुल 26,33,63,490 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

हीमोफीलिया एक दुर्लभ और गंभीर रक्त संबंधी बीमारी है, जिसमें मरीज के शरीर में रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है। इस बीमारी के इलाज में उपयोग होने वाली दवाएं आमतौर पर बेहद महंगी होती हैं, जिसके कारण कई गरीब परिवार इलाज का खर्च वहन करने में असमर्थ रहते हैं। सरकार की इस पहल से राज्य के हीमोफीलिया मरीजों को उन्नत इलाज मुफ्त या सब्सिडी दर पर उपलब्ध हो सकेगा, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में काफी सुधार आने की उम्मीद है।

पथ निर्माण एवं बुनियादी ढांचा: सड़क नेटवर्क को मिलेगी मजबूती

इस बैठक में सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जो राज्य की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।

मुंगेर में एनएच-333 का चौड़ीकरण

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-333 के 28.340 किलोमीटर से 38.840 किलोमीटर तक, यानी गंगटा जंगल तक के हिस्से को सिंगल लेन से 2-लेन में चौड़ा करने के कार्य के लिए 51.22 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस चौड़ीकरण से इस मार्ग पर यातायात सुगम होगा और दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।

मीठापुर-महुली एलिवेटेड पथ

राजधानी पटना में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 2-लेन डाउन रैंप एवं परसा-संपतचक पथ के निर्माण हेतु 82.25 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को मंजूरी दी गई है। यह परियोजना पटना के भीतर यातायात जाम की समस्या को कम करने में सहायक सिद्ध होगी।

तारापुर बाईपास पथ

मुंगेर प्रमंडल के अंतर्गत 7.00 किलोमीटर लंबे तारापुर बाईपास पथ के निर्माण कार्य के लिए 115.90 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। यह बाईपास स्थानीय यातायात को शहर के भीतरी हिस्सों से बाहर निकालने में मदद करेगा, जिससे शहर के भीतर जाम की समस्या कम होगी।

गृह एवं राजस्व विभाग: कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को मजबूती

पुलिस बल का आधुनिकीकरण

राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस बल के आधुनिकीकरण की दिशा में भी बड़ा फैसला लिया गया है। कैबिनेट ने 30 वाटर कैनन वाहनों की खरीद के लिए 26.40 करोड़ रुपये और 86 वज्र वाहनों की खरीद के लिए 36.12 करोड़ रुपये, यानी कुल 62.52 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इन आधुनिक उपकरणों से पुलिस बल को भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अधिक दक्षता मिलेगी।

पटना में विश्व स्तरीय क्रूज टर्मिनल

एक दिलचस्प और पर्यटन को बढ़ावा देने वाले फैसले में, पटना के सबलपुर दियारा (2 एकड़) और दुजरा दियारा (2 एकड़) क्षेत्र में विश्व स्तरीय क्रूज टर्मिनल के विकास के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण को 25 वर्षों के लिए अस्थाई लीज पर भूमि हस्तांतरित करने को मंजूरी दी गई है। यह परियोजना गंगा नदी पर जल परिवहन और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे भविष्य में पटना को नदी-पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।

विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग: उच्च शिक्षा संस्थानों को मिलेगी गति

तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जो राज्य में उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा संस्थानों को मजबूत बनाने में मदद करेंगे।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं कंप्यूटर विज्ञान विश्वविद्यालय

इस नए विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कुल 34 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में समर्पित यह विश्वविद्यालय राज्य के युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो बदलते वैश्विक तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप राज्य के छात्रों को तैयार करेगा।

शहीद जुब्बा सहनी वास्तुकला एवं असैनिक अभियंत्रण विश्वविद्यालय

इसी तरह, इस विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन के लिए भी 34 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। यह विश्वविद्यालय वास्तुकला (आर्किटेक्चर) और सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है, जो राज्य में बुनियादी ढांचे और निर्माण क्षेत्र से जुड़े कुशल पेशेवरों को तैयार करने में मददगार साबित होगा।

समाज कल्याण एवं अन्य विभाग: सामाजिक सुरक्षा और कराधान में राहत

आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी

राज्य की एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के अंतर्गत कार्यरत आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं और सहायिकाओं के मानदेय तथा प्रशासनिक व्यय के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से 477.00 करोड़ रुपये की अग्रिम स्वीकृति दी गई है। यह फैसला राज्य की लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बाल पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

हवाई ईंधन पर वैट में राहत

वाणिज्य-कर विभाग ने क्षेत्रीय संपर्क योजना (RCS) के तहत एक महत्वपूर्ण कर राहत को मंजूरी दी है। विमान ईंधन (ATF) पर वैट की दर को 1 प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत कर दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य राज्य में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देना है, जिससे छोटे शहरों और कस्बों को हवाई मार्ग से जोड़ने की योजनाएं अधिक किफायती बन सकेंगी, और इससे राज्य में हवाई यात्रा को बढ़ावा मिलेगा।

पर्यटन क्षेत्र में निवेश

पर्यटन विभाग के तहत पटना में 'होटल ताज सिटी सेंटर' के निर्माण प्रस्ताव को बिहार पर्यटन नीति के अंतर्गत द्वितीय चरण की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह फैसला राज्य में उच्च स्तरीय आतिथ्य सुविधाओं के विस्तार और पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

समग्र विश्लेषण: इन फैसलों का राज्य पर क्या पड़ेगा असर

इस कैबिनेट बैठक में लिए गए 30 प्रस्ताव राज्य के विकास के लगभग हर महत्वपूर्ण आयाम को छूते हैं। ऊर्जा क्षेत्र में हरित हाइड्रोजन नीति और बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा परियोजनाओं को मंजूरी मिलना दर्शाता है कि बिहार सरकार स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है। कृषि फीडरों के सोलराइजेशन से राज्य के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, वहीं 21,000 से अधिक घरों तक बिजली पहुंचाने की योजना राज्य के दूरदराज के इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को दर्शाती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में हीमोफीलिया जैसी दुर्लभ बीमारी के मरीजों के लिए विशेष योजना लाना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है, क्योंकि ऐसी बीमारियों के इलाज के लिए आमतौर पर विशेष ध्यान और संसाधनों की आवश्यकता होती है।

सड़क निर्माण से जुड़े फैसले, चाहे वह मुंगेर में राष्ट्रीय राजमार्ग का चौड़ीकरण हो या पटना में एलिवेटेड पथ का निर्माण, राज्य में बेहतर यातायात व्यवस्था और कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम हैं। वहीं पुलिस बल के आधुनिकीकरण से राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता और मजबूत होगी।

तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नए विश्वविद्यालयों के लिए पदों का सृजन यह दर्शाता है कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर भी गंभीरता से ध्यान दे रही है, ताकि राज्य के युवाओं को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय के लिए बड़ी राशि स्वीकृत करना और हवाई ईंधन पर कर में राहत देना, दोनों ही फैसले दिखाते हैं कि सरकार सामाजिक कल्याण के साथ-साथ आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर भी समान रूप से ध्यान केंद्रित कर रही है।

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