गंडक के बढ़ते जलस्तर पर सीएम सम्राट चौधरी का गोपालगंज-मोतिहारी में हवाई सर्वेक्षण, प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश!

गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गोपालगंज और मोतिहारी का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने राहत, बचाव और आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन को सतर्क और तत्पर रहने के निर्देश दिए।

गोपालगंज और मोतिहारी में बाढ़ की स्थिति का हवाई सर्वेक्षण करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, नीचे उफनती गंडक नदी और जलमग्न इलाके
गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री ने गोपालगंज और मोतिहारी के बाढ़ संभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया।
गंडक के उफान से प्रभावित गोपालगंज-मोतिहारी क्षेत्र का हवाई निरीक्षण करते सीएम सम्राट चौधरी
आसमान से देखी बाढ़ की तस्वीर

पटना/गोपालगंज/मोतिहारी: गंडक नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर और उत्तर बिहार के कई जिलों में बनी बाढ़ की आशंका के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गोपालगंज और मोतिहारी का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने आसमान से नदी के प्रवाह, तटबंधों की स्थिति और निचले इलाकों में पानी के फैलाव का जायजा लिया। इस दौरान बाढ़ प्रभावित और संभावित प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव और आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन को सतर्क और तत्पर रहने के निर्देश दिए गए।

आसमान से देखी बाढ़ की तस्वीर

हवाई सर्वेक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने गंडक के दोनों किनारों के गांवों, तटबंधों और निचले क्षेत्रों को नजदीक से देखा। इस तरह के सर्वेक्षण का मकसद जमीनी रिपोर्टों को अपनी आंखों से परखना होता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि पानी किन इलाकों की ओर बढ़ रहा है, कहां तटबंधों पर दबाव है और कहां राहत शिविर या बचाव दल की जरूरत पड़ सकती है। गोपालगंज और मोतिहारी दोनों ही जिले गंडक के प्रवाह क्षेत्र में आते हैं, इसलिए नदी के जलस्तर में हर उतार-चढ़ाव का असर यहां की बड़ी आबादी पर पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से मौजूदा हालात की जानकारी ली। उन्होंने साफ निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य बिना किसी देरी के चलें और प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे। जरूरी व्यवस्थाओं में किसी तरह की चूक न हो, इस पर भी जोर दिया गया।

गोपालगंज में खतरे के निशान के ऊपर बह रही गंडक

गोपालगंज में स्थिति पहले से ही चिंताजनक बताई जा रही है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक जिले में गंडक नदी खतरे के निशान से करीब 10 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई थी। जिले के पांच प्रखंडों के 43 गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है और वहां लगातार निगरानी रखी जा रही है।

प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि नदी का पानी गांवों में फैलने की स्थिति में वे समय रहते तटबंधों और नजदीकी सरकारी भवनों जैसे सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। अधिकारियों का कहना है कि पहले से सतर्क रहने से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता है।

मोतिहारी और आसपास के इलाकों पर भी नजर

पूर्वी चंपारण के मुख्यालय मोतिहारी और उसके आसपास के इलाके भी गंडक के जलस्तर से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में गिने जाते हैं। इसी वजह से मुख्यमंत्री के सर्वेक्षण में इस जिले को शामिल किया गया। तटबंधों की मजबूती, नदी के दबाव वाले संवेदनशील बिंदुओं और निचले इलाकों में बसे गांवों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया।

अगस्त में भी हुआ था गंडक का हवाई सर्वेक्षण

यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री ने गंडक की स्थिति का जायजा हवाई मार्ग से लिया हो। 27 अगस्त को नेपाल में आई बाढ़ के बाद उन्होंने सोनपुर से वाल्मीकिनगर तक गंडक नदी का हवाई सर्वेक्षण किया था। उस दौरान बगहा, वाल्मीकिनगर, बेतिया और मोतिहारी क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति और प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की गई थी। मुख्यमंत्री ने वाल्मीकिनगर बैराज का निरीक्षण कर उसके अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में जलस्राव की स्थिति भी देखी थी। तब जलस्राव लगभग 1.06 लाख क्यूसेक बताया गया था।

अधिकारियों के अनुसार 26 अगस्त की रात करीब 11 बजे गंडक का जलस्तर 1,50,200 क्यूसेक के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था। उस समय गंडक से प्रभावित आठ जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया था और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) तथा राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें तैनात की गई थीं।

क्यों अहम है गंडक का जलस्तर

गंडक नदी नेपाल के हिमालयी क्षेत्र से निकलकर वाल्मीकिनगर बैराज के रास्ते बिहार में प्रवेश करती है। इसके बाद यह पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण और वैशाली जैसे जिलों से गुजरते हुए आगे गंगा में मिलती है। नेपाल और ऊपरी पहाड़ी इलाकों में होने वाली भारी बारिश या अचानक आई बाढ़ का सीधा असर बैराज से छोड़े जाने वाले पानी पर पड़ता है। बैराज से छोड़ा गया पानी कुछ ही घंटों में बिहार के निचले इलाकों तक पहुंच सकता है। इसी कारण बैराज के जलस्राव और नदी के जलस्तर की चौबीसों घंटे निगरानी की जाती है।

प्रशासन को क्या निर्देश मिले

मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित और संभावित प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क और तत्पर रहने को कहा है। इन निर्देशों का सार यह है कि:

  • बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेजी से और बिना किसी बाधा के चलें।
  • आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से तैयार रखी जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत उपयोग हो सके।
  • जिला प्रशासन आपसी समन्वय के साथ हालात पर लगातार नजर रखे।
  • लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी पुख्ता रहे।

ग्रामीणों के लिए सावधानी की अपील

प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे नदी के जलस्तर से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें। नदी किनारे या तटबंधों के करीब रहने वाले परिवारों को सलाह दी गई है कि वे जरूरी कागजात, दवाइयां, सूखा राशन और पीने के पानी की व्यवस्था पहले से रखें। बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं को समय रहते सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी भी रखनी चाहिए। बाढ़ के पानी में उतरने, नदी पार करने या तटबंध पर भीड़ लगाने से बचने की हिदायत दी गई है।

आगे की चुनौती

बाढ़ की स्थिति में केवल पानी का उतार-चढ़ाव ही नहीं, बल्कि उसके बाद की चुनौतियां भी बड़ी होती हैं। संपर्क मार्गों का कटना, बिजली और पेयजल आपूर्ति में बाधा, फसलों का नुकसान और जलजनित बीमारियों का खतरा ऐसी ही चुनौतियां हैं। इसलिए राहत के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और पशु चारे जैसी बुनियादी जरूरतों पर भी ध्यान देना जरूरी माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर घटने के बाद भी क्षति के आकलन और पुनर्वास के काम में तेजी रखी जाएगी।

फिलहाल गंडक के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। अगर नेपाल या ऊपरी इलाकों में बारिश बढ़ती है तो बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में बदलाव संभव है, जिसका सीधा असर गोपालगंज, मोतिहारी और आसपास के जिलों पर पड़ेगा। ऐसे में मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह हर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहे और लोगों तक समय पर मदद पहुंचाए।

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