गांधी जयंती पर सीएम सम्राट चौधरी ने बापू के लिए क्या कहा ? पूरा संदेश यहां पढ़ें
गांधी जयंती पर सीएम सम्राट चौधरी की एक पोस्ट चर्चा में है। बापू के लिए उन्होंने ऐसा क्या लिखा, जो सोशल मीडिया पर लोग पढ़ रहे हैं? जानिए पूरा संदेश।
बापू के लिए सम्राट चौधरी ने ऐसा क्या लिखा कि हर कोई पढ़ रहा है? गांधी जयंती पर आया बड़ा संदेश
पटना/नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2026: आज पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती मना रहा है। इस मौके पर बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर बापू को श्रद्धांजलि दी। उनकी यह पोस्ट कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है।
सम्राट चौधरी ने अपने संदेश में क्या कहा?
सम्राट चौधरी ने लिखा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उनके मुताबिक, सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के गांधी जी के विचार आज भी पूरी मानवता को शांति, सद्भाव और प्रेम का संदेश देते हैं।
उन्होंने इसी पोस्ट में अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस की भी सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। संदेश छोटा है, लेकिन ऐसे समय में आया है जब समाज में संवाद और आपसी भरोसे की ज़रूरत पर लगातार चर्चा हो रही है।
2 अक्टूबर का दोहरा महत्व
2 अक्टूबर भारत के कैलेंडर में बेहद खास तारीख है। इसके दो बड़े कारण हैं।
1. गांधी जयंती: मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। इस हिसाब से 2026 में उनकी 157वीं जन्मजयंती है। भारत में यह राष्ट्रीय अवकाश है। स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तरों में प्रार्थना सभाएं, निबंध प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। कई जगह लोग सफाई अभियान भी चलाते हैं।
2. अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2007 में प्रस्ताव पारित कर 2 अक्टूबर को हर साल अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाने का फैसला किया। इसका मकसद शिक्षा और जन-जागरूकता के ज़रिये अहिंसा के संदेश को दुनिया भर में फैलाना है। यानी गांधी जी की सोच सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही, पूरी दुनिया ने उसे मान्यता दी।
कौन-से तीन सिद्धांत आज भी हैं प्रासंगिक?
सम्राट चौधरी ने जिन तीन शब्दों का ज़िक्र किया, वे गांधी दर्शन की बुनियाद हैं।
- सत्य: गांधी जी के लिए सत्य सिर्फ बोलने की चीज़ नहीं था, बल्कि जीने का तरीका था। उन्होंने अपनी आत्मकथा को "सत्य के प्रयोग" नाम दिया।
- अहिंसा: उनके लिए अहिंसा कमज़ोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी नैतिक ताकत थी। इसी रास्ते पर चलकर उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी।
- सत्याग्रह: अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण और नैतिक प्रतिरोध का तरीका। चंपारण, नमक सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन इसके बड़े उदाहरण हैं।
बिहार से गांधी जी का खास रिश्ता
बिहार के लिए गांधी जयंती और भी भावनात्मक है। गांधी जी के भारत में सत्याग्रह के शुरुआती बड़े प्रयोगों में से एक 1917 का चंपारण सत्याग्रह बिहार की धरती पर हुआ। नील की खेती से परेशान किसानों के हक़ में खड़े होकर उन्होंने दिखाया कि बिना हथियार के भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। इसलिए बिहार के नेताओं की ओर से आने वाले गांधी जयंती संदेशों को लोग खास तौर पर ध्यान से पढ़ते हैं।
देश भर में कैसे मनाई जा रही है गांधी जयंती?
हर साल की तरह इस बार भी दिल्ली के राजघाट पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित होती है, जहां शीर्ष नेता बापू की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं। उसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी होती है, जिनका जन्म 2 अक्टूबर 1904 को हुआ था। इस बार उनकी 122वीं जयंती है। विजय घाट पर उन्हें भी श्रद्धांजलि दी जाती है। देश भर में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन अपने-अपने स्तर पर कार्यक्रम करते हैं।
आज के दौर में अहिंसा का संदेश क्यों ज़रूरी?
आज दुनिया कई तरह के संघर्षों और तनावों से गुज़र रही है। सोशल मीडिया पर बढ़ती कड़वाहट और ध्रुवीकरण के माहौल में गांधी जी के विचार एक रास्ता दिखाते हैं।
- संवाद की ताकत: मतभेद हों तो बातचीत सबसे बड़ा रास्ता है।
- सद्भाव: अलग धर्म, भाषा और विचार के लोग मिलकर रह सकते हैं।
- नैतिक नेतृत्व: सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और सादगी की अहमियत।
- युवाओं की भूमिका: नई पीढ़ी इन मूल्यों को डिजिटल दुनिया में भी अपना सकती है।
सम्राट चौधरी का संदेश भी इसी ओर इशारा करता है कि गांधी जी के विचार अतीत की बात नहीं, बल्कि आज की ज़रूरत हैं।
गांधी जयंती पर आप क्या कर सकते हैं?
- अपने आसपास के इलाके की सफाई में हिस्सा लें।
- बच्चों को गांधी जी के जीवन की कहानियां सुनाएं।
- "सत्य के प्रयोग" जैसी किताब का कोई अंश पढ़ें।
- सोशल मीडिया पर नफरत नहीं, सद्भाव का संदेश साझा करें।
- खादी या स्थानीय उत्पादों को अपनाने का संकल्प लें।
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