सीधे ट्वीट करें, समस्या सुलझेगी: बिहार सीएम ऑफिस का नया हथियार @BiharCMQRT, 24 घंटे काम करेगी हाई-लेवल टीम!

बिहार में पहली बार आम लोगों की समस्याओं के तुरंत समाधान के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नया हैंडल @BiharCMQRT शुरू किया है। सचिव से लेकर एसडीपीओ रैंक तक के अधिकारियों वाली यह टीम 24 घंटे काम करेगी और शिकायत मिलते ही संबंधित जिले या अफसर को फोन कर समाधान का आदेश देगी।

बिहार मुख्यमंत्री कार्यालय के नए सोशल मीडिया हैंडल BiharCMQRT और शिकायत निवारण मॉडल का प्रतीकात्मक चित्रण
मुख्यमंत्री कार्यालय ने आम लोगों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक्स पर नया हैंडल @BiharCMQRT शुरू किया है, जिसकी निगरानी 24 घंटे एक हाई-लेवल टीम करेगी।

पटना: सरकारी दफ्तरों के चक्कर, बाबुओं की मिन्नतें और फाइलों के अटकने की शिकायतें अब तक बिहार में आम बात रही हैं। लेकिन अब मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने इस पूरी व्यवस्था को बदलने के लिए एक नया मॉडल तैयार किया है। राज्य में पहली बार आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सीएमओ का नया आधिकारिक हैंडल @BiharCMQRT बनाया गया है। अब किसी भी नागरिक को अपनी शिकायत के लिए दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि सिर्फ समस्या का विवरण या फोटो इस हैंडल को टैग करते हुए पोस्ट करना होगा।

कौन चलाएगा यह नई व्यवस्था

इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में एक विशेष टीम बनाई गई है, जिसे "सीएम क्यूआरटी" यानी क्विक रिस्पॉन्स टीम नाम दिया गया है। इस टीम में सचिव स्तर से लेकर एसडीपीओ रैंक तक के अधिकारी शामिल किए गए हैं, ताकि किसी भी स्तर की समस्या पर उचित अधिकारी के जरिए तुरंत कार्रवाई हो सके। सबसे अहम बात यह है कि यह टीम 24 घंटे सक्रिय रहेगी, यानी नागरिक दिन हो या रात, कभी भी अपनी शिकायत पोस्ट कर सकेंगे। फिलहाल इस व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है और आने वाले दिनों में इसे आम जनता के लिए औपचारिक रूप से शुरू किया जाएगा।

कैसे काम करेगा यह सिस्टम

इस नए मॉडल को तीन अलग-अलग चरणों में बांटा गया है, जो मिलकर पूरी शिकायत निवारण प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाएंगे।

पहला चरण है ट्रैकिंग। जैसे ही कोई नागरिक बिजली, सड़क, स्वास्थ्य सेवा, लोक स्वास्थ्य एवं अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी), नाली या किसी ब्लॉक स्तर की समस्या को लेकर @BiharCMQRT को टैग करते हुए शिकायत या फोटो पोस्ट करेगा, सीएमओ की मॉनिटरिंग सेल उसे तुरंत ट्रैक करना शुरू कर देगी।

दूसरा चरण है त्वरित आदेश। शिकायत ट्रैक होने के बाद सीएम ऑफिस के अधिकारी सीधे संबंधित जिले के प्रशासनिक अमले या जिम्मेदार अफसर को फोन करेंगे और तय समय में समस्या का समाधान करने का आदेश देंगे।

तीसरा और अंतिम चरण है एक्शन रिपोर्ट। समस्या का समाधान होने के बाद इसकी पूरी जानकारी पोर्टल पर दर्ज होगी, जिसमें यह साफ तौर पर बताया जाएगा कि कितने समय में कार्रवाई पूरी हुई। यह टाइम-बाउंड यानी समय-सीमा में दर्ज होने वाली एक्शन रिपोर्ट इस बात की गारंटी देगी कि शिकायत सिर्फ फाइलों में दर्ज होकर नहीं रह जाएगी, बल्कि उसका कोई ठोस नतीजा जरूर निकलेगा।

किन समस्याओं का होगा समाधान

इस नए मॉडल के जरिए जिन समस्याओं के समाधान की उम्मीद की जा रही है, उनकी सूची भी काफी व्यापक है। इनमें सड़क, बिजली, एफआईआर दर्ज कराने से जुड़ी दिक्कतें, पेयजल की समस्या, राशन और पेंशन कार्ड बनवाने में देरी, जमाबंदी से जुड़े मामले, आय, जाति और आवासीय प्रमाण पत्र बनाने में होने वाली परेशानी, स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति, परीक्षाओं में देरी, ओवरस्पीडिंग और ट्रैफिक जाम जैसी रोजमर्रा की समस्याएं शामिल हैं। यानी यह व्यवस्था सिर्फ किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनजीवन से जुड़े लगभग हर बड़े मुद्दे को इसके दायरे में रखा गया है।

दूसरे राज्यों में भी चल रहे हैं इसी तरह के मॉडल

बिहार सरकार का यह कदम पूरी तरह नया भले ही राज्य के लिए हो, लेकिन देश के कुछ अन्य राज्यों में इससे मिलते-जुलते मॉडल पहले से काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री कार्यालय की सोशल मीडिया सेल शिकायतों को सीधे संबंधित जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को फॉरवर्ड करती है। मध्य प्रदेश में सीएम डैशबोर्ड के जरिए सोशल मीडिया और कॉल सेंटर दोनों माध्यमों से आई शिकायतों की निगरानी की जाती है। ओडिशा में मुख्यमंत्री कार्यालय का अपना कॉल सेंटर काम करता है, जबकि असम में सोशल मीडिया पर आने वाली शिकायतों पर मुख्यमंत्री सचिवालय सीधे संज्ञान लेता है। आंध्र प्रदेश में तो शिकायतों पर 72 घंटे के भीतर कार्रवाई किए जाने की व्यवस्था है। इन राज्यों के अनुभवों को देखते हुए माना जा रहा है कि बिहार में भी यह मॉडल प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने में कारगर साबित हो सकता है।

सीएम क्यूआरटी एक नज़र में:

➤ 📲 सीधी शिकायत: नागरिक अब सीधे BiharCMQRT के एक्स हैंडल पर अपनी शिकायत पोस्ट कर सकते हैं।

➤ ⏱️ 24 घंटे निगरानी: एक हाई-लेवल टीम 24 घंटे शिकायतों पर नजर रखेगी और संबंधित अधिकारियों से समन्वय करेगी।

➤ 🏛️ व्यापक दायरा: सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिसिंग, पेंशन, राशन और भूमि से जुड़े मुद्दों की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

➤ ⚡ तुरंत फॉरवर्डिंग: शिकायत मिलते ही उसे संबंधित विभाग या अधिकारी के पास कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।

➤ 📄 एक्शन रिपोर्ट: समस्या सुलझने के बाद समाधान का पूरा विवरण दर्शाते हुए एक एक्शन रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।

➤ 🤝 मकसद: इस व्यवस्था का लक्ष्य सरकारी शिकायत निवारण प्रणाली को पहले से तेज़, आसान और जनता के लिए अधिक सुलभ बनाना है।

दफ्तरों की दौड़ से मिलेगी मुक्ति

इस पूरी पहल का सबसे बड़ा मकसद आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से छुटकारा दिलाना है। अब तक किसी भी शिकायत के लिए लोगों को ब्लॉक कार्यालय, अनुमंडल कार्यालय या कलेक्ट्रेट के कई चक्कर लगाने पड़ते थे और कई बार बाबुओं के सामने मिन्नतें भी करनी पड़ती थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद नागरिक घर बैठे ही अपने मोबाइल फोन से शिकायत दर्ज कर सकेंगे, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होगी।

अफसरों की जवाबदेही तय करने की कोशिश

इस मॉडल की एक और खासियत यह है कि इसमें निर्देश सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी होंगे। जब कोई आदेश सीधे सीएमओ स्तर से आता है, तो जिला स्तर या क्षेत्रीय स्तर के अफसरों की जवाबदेही स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। इससे फाइलों को लंबे समय तक दबाकर रखने की पुरानी प्रवृत्ति पर भी रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि हर शिकायत का रियल-टाइम स्टेटस दिखेगा और समाधान के बाद संबंधित नागरिक से फीडबैक भी लिया जाएगा।

भ्रष्टाचार पर नियंत्रण की भी कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई शिकायत सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया पर दर्ज होती है, तो उस मामले को दबाना या नजरअंदाज करना प्रशासन के लिए कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाता है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि छोटे स्तर पर होने वाली रिश्वतखोरी पर भी कुछ हद तक नियंत्रण लगने की संभावना रहती है, क्योंकि अफसरों को पता रहेगा कि उनकी कार्यप्रणाली सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी में है।

आगे की राह

फिलहाल यह व्यवस्था अपने अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही जनता के लिए औपचारिक रूप से लॉन्च किया जाना है। अब देखने वाली बात यह होगी कि लॉन्च के बाद इस हैंडल पर आने वाली शिकायतों की संख्या कितनी रहती है और सीएम क्यूआरटी किस औसत समय में उनका समाधान कर पाती है। अगर यह मॉडल उम्मीद के मुताबिक काम करता है, तो आम बिहारवासियों के लिए यह सरकारी तंत्र के साथ उनके रोजमर्रा के जुड़ाव का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।

Reader Discussion (0)

Moderated • Keep discussion constructive

No comments yet. Be the first to share your thoughts!