पटना का कचरा अब बनेगा कमाई का जरिया, 50 करोड़ की आय का लक्ष्य; कृषि फीडरों के लिए 5,500 करोड़ का सौर अनुदान!
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बापू टावर में कहा कि पटना के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से 50 करोड़ रुपये आय का लक्ष्य है। कृषि फीडरों के सौरीकरण के लिए सरकार 5,500 करोड़ रुपये का अनुदान दे रही है।
पटना | राजधानी पटना के बापू टावर में आयोजित एक कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में चल रही और प्रस्तावित कई महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी साझा की। इस दौरान उन्होंने विकास, पर्यावरण और शिक्षा से जुड़े लक्ष्यों को सामने रखते हुए बताया कि पटना शहर का कचरा अब सिर्फ सफाई व्यवस्था की चुनौती नहीं रहेगा, बल्कि इसे आय के स्रोत के रूप में भी विकसित किया जाएगा।
पटना के कचरे से 50 करोड़ रुपये आय का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम में कहा कि पटना के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से राज्य सरकार ने करीब 50 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य रखा है। उनके अनुसार, राज्य सरकार शहरों से निकलने वाले कचरे के बेहतर और वैज्ञानिक निपटान के माध्यम से न केवल स्वच्छता सुनिश्चित करना चाहती है, बल्कि इससे होने वाली आय को भी राजस्व के एक नए स्रोत के रूप में विकसित करना चाहती है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के इस मॉडल के तहत कचरे से बिजली, खाद और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, जिससे शहरी निकायों को वित्तीय रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी और कृषि फीडरों का सौरीकरण
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी भी तैयार की है, जो राज्य में स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोलराइजेशन के जरिए किसानों को निर्बाध और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले सरकारी खर्च को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
कृषि फीडरों के लिए 5,500 करोड़ रुपये का अनुदान
इस योजना को लेकर मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार की ओर से 5,500 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। उनके अनुसार, कृषि फीडरों के सौरीकरण से किसानों को खेती और सिंचाई के लिए पर्याप्त और नियमित बिजली मिल सकेगी, जिससे सिंचाई व्यवस्था मजबूत होने के साथ-साथ किसानों को बिजली की अनुपलब्धता से जुड़ी परेशानियों में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
सरकार का फोकस केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सौर ऊर्जा के व्यापक इस्तेमाल से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और सरकारी खर्च को नियंत्रित रखने की भी दीर्घकालिक योजना है। गौरतलब है कि इससे पहले भी ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठकों में मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना और कुटीर ज्योति योजना के तहत सोलर संयंत्र स्थापित करने की गति बढ़ाने के निर्देश दे चुके हैं, जो इस व्यापक सौर ऊर्जा रणनीति का ही हिस्सा हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी घोषणाएं
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बिहार के सभी 38 इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब केवल 10 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसका उद्देश्य उच्च तकनीकी शिक्षा को अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक सुगमता से पहुंचाना है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में 700 मॉडल स्कूल संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें करीब 3.5 लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
इन विद्यार्थियों को पढ़ाई में अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने के लिए 'विद्यार्थी साथी' ऐप के माध्यम से 24x7 ऑनलाइन ट्यूटर की सुविधा दी जा रही है, जिससे छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई से संबंधित समस्याओं का समाधान किसी भी समय ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को और बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है, ताकि डिजिटल माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।
संस्कृति, विरासत और बापू टावर का महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने और उसे आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करने पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में विकसित हो रहे अंतरराष्ट्रीय स्तर के संग्रहालयों के लिए बिहार के विशेषज्ञों और सलाहकारों की सेवाएं ली जा रही हैं, जो राज्य की विशेषज्ञता को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करता है।
मुख्यमंत्री ने बापू टावर को बिहार के इतिहास तथा महात्मा गांधी के जीवन, विचारों और संघर्षों को समझने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया। कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री से सम्मानित मूर्तिकार ब्रह्मदेव पंडित द्वारा निर्मित महात्मा गांधी की प्रतिमा का भी अनावरण किया गया। इसके साथ ही बापू टावर में ऑनलाइन टिकटिंग प्रणाली की शुरुआत की गई तथा 'सत्याग्रह' नामक पत्रिका का विमोचन भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि सत्य, अहिंसा, सेवा और स्वच्छता जैसे गांधीवादी मूल्यों को राज्य की विकास योजनाओं से जोड़ना बेहद आवश्यक है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी नमन करते हुए उनके जीवन से सादगी, सत्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा लेने की बात कही।
कार्यक्रम में मौजूद रहे कई गणमान्य अतिथि
इस कार्यक्रम में भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, वरिष्ठ गांधीवादी विचारक रामजी सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह और बापू टावर के निदेशक विनय कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान परिवर्तन समूह के कलाकारों ने गांधी भजन एवं लोकगीतों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और प्रेरणादायक बन गया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल
शहरी कचरा प्रबंधन आज देशभर के शहरों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, और पटना जैसे तेजी से बढ़ते महानगर के लिए यह चुनौती और भी बड़ी है। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 'कचरे से आय' का यह मॉडल न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देगा, बल्कि नगर निगम और स्थानीय निकायों के लिए राजस्व का एक नया और स्थायी स्रोत भी तैयार करेगा। इसी तरह, कृषि फीडरों के सौरीकरण के लिए दिया जा रहा 5,500 करोड़ रुपये का अनुदान राज्य के किसानों के लिए दीर्घकालिक राहत साबित हो सकता है, क्योंकि इससे सिंचाई के लिए भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी और परंपरागत ग्रिड पर दबाव भी कम होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में भी एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार की यह रणनीति स्वच्छ ऊर्जा, कृषि विकास और शहरी स्वच्छता—तीनों क्षेत्रों को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।
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