बेतिया के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे CM सम्राट चौधरी, नाव से पहुंचे शिवराजपुर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बुधवार को पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित बथना पहुंचे। SDRF नाव से शिवराजपुर तक पहुंचकर पीड़ितों से मिले, राहत सामग्री बंटवाई और तटबंध मजबूत करने का भरोसा दिया।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बेतिया के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में राहत शिविर का निरीक्षण करते हुए
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत शिविरों का जायजा लिया और पीड़ितों से मुलाकात की

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में गंडक नदी में आई भीषण बाढ़ से हालात गंभीर बने हुए हैं। इसी बीच बुधवार, 30 सितंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद बाढ़ प्रभावित बेतिया क्षेत्र में पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री का यह दौरा सिर्फ प्रशासनिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से सीधा संवाद कर उनकी परेशानियों को करीब से समझा।

बथना पहुंचे मुख्यमंत्री, राहत शिविर का किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बुधवार दोपहर पश्चिम चंपारण के बथना स्थित पीएम श्री सरकारी प्लस-टू हाई स्कूल पहुंचे, जहां उन्होंने बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया और राहत व बचाव कार्यों की तैयारियों की समीक्षा की। बथना में बनाई गई व्यवस्थाओं की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री यहां से मछरगांव होते हुए बनकटवा पहुंचे।

SDRF नाव से बाढ़ प्रभावित शिवराजपुर पहुंचे CM

बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री को बाढ़ प्रभावित शिवराजपुर क्षेत्र तक पहुंचने के लिए SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) की नाव का सहारा लेना पड़ा। इस दौरे के दौरान उन्होंने बाढ़ की वास्तविक स्थिति और स्थानीय निवासियों को हो रही कठिनाइयों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा।

राहत शिविर में पीड़ितों से मुलाकात, सुनीं शिकायतें

दौरे के बाद मुख्यमंत्री बथना स्थित बाढ़ राहत शिविर पहुंचे, जहां उन्होंने वहां उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से सीधे बातचीत की, उनकी शिकायतें सुनीं और प्रशासन की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री की इस पहल से राहत शिविर में मौजूद लोगों को यह विश्वास मिला कि सरकार उनकी समस्याओं के प्रति गंभीर है।

दौरे के दौरान प्रभावित निवासियों के बीच राहत सामग्री का वितरण भी किया गया। बथना से शिवराजपुर तक पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारी और पुलिसकर्मी राहत व बचाव कार्यों में तैनात रहे।

तटबंधों को मजबूत करने का भरोसा

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दौरे के दौरान स्पष्ट किया कि गंडक और कोसी नदियों के तटबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार गंभीरता से काम करेगी। बार-बार बाढ़ की स्थिति से जूझ रहे इन क्षेत्रों के लिए यह आश्वासन स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी राहत की बात है।

गंडक नदी में बाढ़ की पृष्ठभूमि

पश्चिम चंपारण में गंडक नदी के जलस्तर में अचानक तेज बढ़ोतरी के बाद बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई है। इससे पहले अगस्त महीने में भी नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंडक नदी और सीमावर्ती क्षेत्रों — बगहा, वाल्मीकि नगर, बेतिया और मोतिहारी — का हवाई सर्वेक्षण किया था और प्रशासन को पूरी तैयारी के साथ सतर्क रहने के निर्देश दिए थे।

उस समय मुख्यमंत्री ने कहा था कि नेपाल में आई आपदा चिंता का विषय है, लेकिन ईश्वर की कृपा से बिहार में स्थिति नियंत्रण में रही। हालांकि हाल के दिनों में गंडक नदी के जलस्तर में फिर से वृद्धि के चलते पश्चिम चंपारण में हालात एक बार फिर गंभीर हो गए हैं, जिसके बाद मुख्यमंत्री को एक बार फिर मौके पर पहुंचना पड़ा।

सरकार की प्राथमिकता: लोगों की सुरक्षा

अपने पिछले दौरों में भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि आपदा की इस घड़ी में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें हर संभव सहायता पहुंचाना राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार बढ़ते जा रहे मुख्यमंत्री के दौरे इस प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री सोनपुर स्थित एक राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचकर उनसे सीधा संवाद कर चुके हैं, जहां उन्होंने राहत शिविर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया था और लोगों के रहने, खाने-पीने के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही थी।

स्थानीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

हालांकि यह भी सामने आया है कि पश्चिम चंपारण के कुछ बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थानीय सांसद व विधायकों के खिलाफ पीड़ितों में नाराजगी भी देखी गई है, जो दिखाता है कि बाढ़ राहत कार्यों को लेकर जमीनी स्तर पर चुनौतियां अभी बनी हुई हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का सीधे मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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