बिहार में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन: बक्सर से किशनगंज तक हाई स्पीड कॉरिडोर, पटना-दिल्ली सफर सिर्फ 4.5 घंटे में
बिहार में बुलेट ट्रेन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत बक्सर से किशनगंज तक करीब 1550 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनेगा, जिस पर ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से दौड़ सकेगी। इससे पटना से दिल्ली का सफर महज साढ़े 4 घंटे में पूरा हो सकेगा।
बिहार के लोगों के लिए बुलेट ट्रेन का सपना अब धीरे-धीरे हकीकत की ओर बढ़ता दिख रहा है। दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, और इस परियोजना के पूरा होने के बाद राज्य के लोगों को न सिर्फ तेज रफ्तार यात्रा का अनुभव मिलेगा, बल्कि व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में भी बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।

कहां से कहां तक बनेगा कॉरिडोर?
रेलवे सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित हाई स्पीड रेल कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के वाराणसी से बिहार की सीमा में दाखिल होगा। इसके बाद यह ट्रेन बक्सर, आरा और पटना जैसे शहरों से होते हुए आगे बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज की तरफ बढ़ेगी, और अंत में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगी। यानी बिहार के भीतर यह कॉरिडोर बक्सर से लेकर किशनगंज तक राज्य के एक बड़े हिस्से को कवर करेगा।
हालांकि रूट में शामिल सभी शहरों में स्टेशन बनेंगे या नहीं, इसकी अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। मौजूदा जानकारी के अनुसार बक्सर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया और कटिहार में स्टेशन प्रस्तावित बताए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम स्टेशन, रूट और अलाइनमेंट को लेकर स्पष्ट तस्वीर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), सर्वे और सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगी।
सिर्फ साढ़े 4 घंटे में पटना से दिल्ली
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ्तार है। पूरा दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी कॉरिडोर करीब 1550 से 1560 किलोमीटर लंबा बताया जा रहा है, और इस पर बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटा रखे जाने की संभावना है। इसका सीधा मतलब यह है कि हाई स्पीड रेल नेटवर्क शुरू होने के बाद पटना से दिल्ली की दूरी महज 4 घंटे 41 मिनट में तय की जा सकेगी।
यह रफ्तार मौजूदा व्यवस्था की तुलना में बेहद क्रांतिकारी है, क्योंकि इस समय ट्रेन के हिसाब से पटना से दिल्ली पहुंचने में करीब 10 से 12 घंटे तक का समय लग जाता है। यानी बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद यह सफर लगभग आधे से भी कम समय में पूरा हो सकेगा। इसी तरह पटना से सिलीगुड़ी की दूरी भी हाई स्पीड रेल के जरिए करीब दो घंटे में पूरी होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
चरणबद्ध तरीके से होगा निर्माण
इतनी बड़ी परियोजना को एक साथ पूरा करना आसान नहीं है, इसलिए इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना बनाई गई है। सबसे पहले दिल्ली-वाराणसी सेक्शन पर काम आगे बढ़ेगा, उसके बाद वाराणसी से सिलीगुड़ी तक का हिस्सा इस पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा बनेगा। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) पहले ही दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) रेल मंत्रालय को सौंप चुका है। हालांकि बिहार में इस हाई स्पीड ट्रेन का अंतिम रूट, स्टेशन की लोकेशन और निर्माण शुरू होने की समयसीमा अभी पूरी तरह तय नहीं हो पाई है।
परियोजना की डीपीआर और रूट सर्वे पूरा होने के बाद ही भूमि अधिग्रहण जैसी अगली प्रक्रियाएं आगे बढ़ेंगी, जो किसी भी बड़ी रेल परियोजना का सबसे अहम और संवेदनशील चरण माना जाता है।
320 किमी/घंटा की रफ्तार, स्लैब ट्रैक तकनीक का इस्तेमाल
इस हाई स्पीड कॉरिडोर को मौजूदा रेलवे ट्रैक से बिल्कुल अलग और आधुनिक तकनीक पर विकसित किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक कॉरिडोर को 320 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की गति को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाएगा। ट्रेन की परिचालन गति भले ही 320 किमी प्रति घंटा रखी जाए, लेकिन ट्रैक की डिजाइन स्पीड सुरक्षा की दृष्टि से 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखी जा सकती है।
इतनी तेज रफ्तार पर ट्रेन का सुरक्षित और स्थिर संचालन सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक गिट्टी वाले ट्रैक की जगह स्लैब ट्रैक तकनीक इस्तेमाल की जाएगी। इसके साथ ही कॉरिडोर में डबल लाइन, पुल, स्टेशन, डिपो, मेंटेनेंस डिपो और जरूरत पड़ने पर सुरंगों का निर्माण भी अंतरराष्ट्रीय हाई स्पीड रेल मानकों के अनुरूप किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित स्टेशनों पर करीब 415 मीटर लंबे प्लेटफॉर्म बनाए जाने की योजना है, जो हाई स्पीड ट्रेनों की लंबाई और यात्री क्षमता को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जाएंगे।
पटना में कहां बनेगा स्टेशन?
पटना में हाई स्पीड रेल स्टेशन के लिए सही जगह को लेकर फिलहाल चर्चा जारी है। इसके लिए दो प्रमुख विकल्प सामने आए हैं—फुलवारीशरीफ (एम्स के आसपास का इलाका) और बिहटा। हालांकि अभी इनमें से किसी भी जगह को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। विस्तृत सर्वे और परियोजना की अंतिम डीपीआर तैयार होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि पटना का स्टेशन आखिर किस इलाके में बनेगा।
व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बड़ा बूस्ट
इस परियोजना का फायदा सिर्फ यात्रियों के समय की बचत तक सीमित नहीं रहेगा। हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पूरा होने के बाद बिहार के प्रमुख शहरों की दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से रेल कनेक्टिविटी काफी तेज हो जाएगी। इससे न सिर्फ आम यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी सीधा फायदा मिलेगा। तेज कनेक्टिविटी से निवेश के नए अवसर बनने और बिहार के अलग-अलग शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
फिलहाल यह परियोजना शुरुआती दौर में है और इसका पूरा खाका डीपीआर तथा सर्वे पूरा होने के बाद ही साफ होगा, लेकिन इतना तय है कि अगर यह हाई स्पीड रेल कॉरिडोर योजना के मुताबिक धरातल पर उतरता है, तो यह बिहार के परिवहन ढांचे और आर्थिक विकास दोनों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
No comments yet. Be the first to share your thoughts!