बिहार सरकार का बड़ा कदम: 22 सितंबर से 'अभियान बसेरा' के तहत हर पंचायत में लगेगा वासभूमि शिविर

बिहार के हर भूमिहीन परिवार को अपना आशियाना देने के संकल्प के साथ राज्य सरकार ने 'अभियान बसेरा' के तहत 22 सितंबर 2026 से सभी पंचायतों में विशेष शिविर आयोजित करने का फैसला किया है। इन शिविरों में गृहस्थल (वासभूमि) के पर्चे के लिए आवेदन लिए जाएंगे, साथ ही ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अभियान बसेरा योजना के तहत भूमिहीन परिवारों के लिए वासभूमि पर्चा शिविर की घोषणा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर 'अभियान बसेरा' योजना की जानकारी साझा की

बिहार सरकार ने राज्य के भूमिहीन परिवारों के लिए एक बड़ी और राहत भरी पहल का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए जानकारी दी है कि राज्य सरकार ने 'अभियान बसेरा' के तहत 22 सितंबर 2026 से बिहार की सभी पंचायतों में विशेष शिविर आयोजित करने का फैसला लिया है। इस पहल का मकसद साफ है—बिहार के हर उस परिवार को अपनी छत मिले, जिसके पास आज तक रहने के लिए अपनी जमीन नहीं है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सरकार का संकल्प है कि राज्य के प्रत्येक भूमिहीन परिवार को अपना आशियाना मिले, और इसी सोच के साथ यह विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। यह कदम बिहार सरकार की उन तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं की अगली कड़ी माना जा रहा है, जिनके जरिए राज्य में गरीब और वंचित तबकों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास लगातार किया जा रहा है।

बिहार भूमि पोर्टल की वेबसाइट जहां से वासभूमि के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है
biharbhumi.bihar.gov.in पोर्टल पर वासभूमि के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

क्या है 'अभियान बसेरा' योजना?

'अभियान बसेरा' असल में बिहार सरकार की एक विशेष मुहिम है, जिसका सीधा संबंध राज्य के भूमिहीन परिवारों को गृहस्थल यानी वासभूमि का पर्चा उपलब्ध कराने से है। सरल शब्दों में कहें तो जिन परिवारों के पास रहने के लिए अपनी जमीन नहीं है, उन्हें सरकार द्वारा वासभूमि आवंटित की जाएगी और इसका कानूनी दस्तावेज यानी पर्चा भी दिया जाएगा। यह पर्चा किसी भी परिवार के लिए बेहद अहम दस्तावेज होता है, क्योंकि इसी के आधार पर वह अपनी जमीन पर कानूनी रूप से मकान बना सकता है और सरकारी योजनाओं का लाभ भी उठा सकता है।

अब तक कई ऐसे परिवार रहे हैं जो वर्षों से वासभूमि के पर्चे के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहे, लेकिन प्रक्रिया की जटिलता और जानकारी की कमी के चलते उन्हें यह अधिकार नहीं मिल पाया। 'अभियान बसेरा' के जरिए सरकार अब इस पूरी प्रक्रिया को गांव-गांव तक, यानी सीधे पंचायत स्तर तक लेकर आ रही है, ताकि किसी भी पात्र परिवार को इसके लिए दूर नहीं जाना पड़े।

22 सितंबर से शुरू होंगे विशेष शिविर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मुताबिक, इस अभियान के तहत 22 सितंबर 2026 से बिहार की सभी पंचायतों में विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य गृहस्थल यानी वासभूमि से जुड़े आवेदनों को मौके पर ही स्वीकार करना और लोगों की समस्याओं का तुरंत समाधान करना है। सरकार की मंशा है कि किसी भी परिवार को वासभूमि के पर्चे के लिए किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े।

इन शिविरों में इच्छुक और पात्र परिवार सीधे अपने आवेदन जमा कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपने नजदीकी ग्राम पंचायत या अंचल कार्यालय जाना होगा, जहां आवेदन प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और सुलभ बनाने पर खास ध्यान दिया है, ताकि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग भी बिना किसी परेशानी के अपना आवेदन दर्ज करा सकें।

आवेदन प्रक्रिया को लेकर सरकार सख्त, अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि इस अभियान को लेकर सभी संबंधित अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे शिविर में आने वाले हर आवेदन को स्वीकार करें और आवेदक को उसकी रसीद भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर देखा जाता रहा है कि सरकारी दफ्तरों में आवेदन जमा करने के बावजूद आवेदकों को कोई रसीद या पावती नहीं दी जाती, जिससे बाद में उन्हें अपने आवेदन की स्थिति ट्रैक करने में दिक्कत होती है।

रसीद अनिवार्य किए जाने से अब हर आवेदक के पास एक ठोस प्रमाण रहेगा कि उसने अपना आवेदन कब और कहां जमा किया है, जिससे आगे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी भी तरह की देरी या गड़बड़ी की स्थिति में आवेदक अपनी बात मजबूती से रख सकेगा।

घर बैठे भी कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन

'अभियान बसेरा' के तहत सरकार ने सिर्फ पंचायत स्तर पर शिविर लगाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि डिजिटल सुविधा को भी इस योजना का हिस्सा बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि आवेदकों की सुविधा के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिहार भूमि पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था भी शुरू की है।   https://biharbhumi.bihar.gov.in/Biharbhumi/

इसका मतलब यह है कि जिन लोगों के लिए पंचायत या अंचल कार्यालय जाना संभव नहीं है, वे घर बैठे भी बिहार भूमि पोर्टल के माध्यम से गृहस्थल (वासभूमि) के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह पोर्टल राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा संचालित किया जाता है और इसका उद्देश्य भूमि से जुड़ी तमाम प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से आसान और पारदर्शी बनाना है।

ऑनलाइन आवेदन की यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगी जो किसी वजह से बाहर रहते हैं, जैसे कि रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में गए प्रवासी मजदूर, या फिर वे लोग जिन्हें शारीरिक रूप से शिविर तक पहुंचने में दिक्कत होती है। ऐसे परिवार अब बिना पंचायत या अंचल कार्यालय गए भी अपना आवेदन दर्ज करा सकते हैं और अपनी वासभूमि के अधिकार की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

सरकार का लक्ष्य: कोई भी पात्र परिवार न छूटे

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संदेश के अंत में सरकार की मंशा और लक्ष्य को बेहद स्पष्ट शब्दों में रखा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि बिहार का कोई भी पात्र परिवार आवासीय भूमि के अधिकार से वंचित न रहे। यह बयान इस योजना की गंभीरता और सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

गौरतलब है कि जमीन और आवास का मुद्दा ग्रामीण बिहार में हमेशा से एक संवेदनशील और अहम विषय रहा है। बहुत से गरीब और वंचित परिवार पीढ़ियों से बिना अपनी जमीन के रह रहे हैं, जिसकी वजह से न सिर्फ उन्हें आवास योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत आती है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी वे पिछड़ जाते हैं। वासभूमि का पर्चा मिलने के बाद ऐसे परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी आसानी से उठा पाएंगे, क्योंकि इसके लिए जमीन का मालिकाना हक होना जरूरी शर्त होती है।

क्यों खास है यह अभियान?

अगर इस पूरी पहल को बारीकी से समझा जाए, तो 'अभियान बसेरा' सिर्फ एक सरकारी योजना भर नहीं है, बल्कि यह राज्य के सबसे वंचित तबके को सम्मान और अधिकार दिलाने की दिशा में एक ठोस कोशिश है। पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर सरकार ने प्रक्रिया को आम लोगों के दरवाजे तक पहुंचाया है, वहीं ऑनलाइन पोर्टल के जरिए डिजिटल सुविधा भी सुनिश्चित की गई है। यानी सरकार ने पारंपरिक और डिजिटल—दोनों तरीकों को साथ लेकर चलने की रणनीति अपनाई है, ताकि अधिक से अधिक पात्र परिवार इस योजना का लाभ उठा सकें।

इसके अलावा अधिकारियों को रसीद देने का सख्त निर्देश देकर सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि जमीनी स्तर पर योजना का क्रियान्वयन पारदर्शी तरीके से हो और किसी भी आवेदक के साथ कोई अनियमितता न हो।

आगे क्या करना होगा?

जो भी परिवार भूमिहीन हैं और वासभूमि के पर्चे के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे 22 सितंबर 2026 से अपनी नजदीकी ग्राम पंचायत या अंचल कार्यालय में आयोजित होने वाले विशेष शिविर में जाकर आवेदन जमा कर सकते हैं। इसके अलावा जो लोग ऑनलाइन आवेदन करना चाहते हैं, वे बिहार भूमि पोर्टल पर जाकर घर बैठे भी अपना आवेदन दर्ज करा सकते हैं। आवेदन के बाद संबंधित अधिकारी से रसीद जरूर लें, ताकि भविष्य में आवेदन की स्थिति को ट्रैक किया जा सके।

कुल मिलाकर देखा जाए तो 'अभियान बसेरा' बिहार सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें हर वर्ग, खासकर सबसे वंचित और भूमिहीन परिवारों तक बुनियादी अधिकार पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह अभियान जमीन पर कितनी तेजी से और कितनी पारदर्शिता के साथ लागू होता है, और कितने परिवारों को इसका सीधा फायदा मिलता है।

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