गंगा, गंडक और सोन में रिकॉर्ड जलस्तर: सीएम सम्राट चौधरी ने अफसरों को दिया बाढ़ क्षति की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश!
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ की स्थिति और उससे हुए नुकसान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जल्द से जल्द विस्तृत क्षति आकलन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
पटना: बिहार में इस साल आई भीषण बाढ़ से हुए नुकसान का सही-सही आकलन करने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। लोक सेवक आवास स्थित 'संकल्प' सभागार में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य में बाढ़ की मौजूदा स्थिति और उससे हुए नुकसान की विस्तार से समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द एक विस्तृत क्षति आकलन रिपोर्ट सरकार को सौंपें।
दो चरणों में आई भीषण बाढ़
बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव चंद्रशेखर सिंह ने मुख्यमंत्री को राज्य में आई बाढ़ के दोनों चरणों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले चरण में गंगा, सोन, घाघरा, कोसी और पुनपुन नदियों में नया उच्चतम जलस्तर दर्ज किया गया, जो बीते वर्षों के मुकाबले कहीं अधिक था। इसके बाद दूसरे चरण में झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों में हुई भारी बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में एक बार फिर तेज बढ़ोतरी देखी गई, जिससे राज्य के कई हिस्सों में स्थिति और गंभीर हो गई।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि गंगा, गंडक और सोन नदियों में पिछले वर्षों की तुलना में इस बार असाधारण रूप से अधिक मात्रा में पानी आने के कारण राज्य में गंभीर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार में इस साल अब तक सामान्य से 30 प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद पड़ोसी राज्यों झारखंड, उत्तर प्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल में हुई भारी बारिश की वजह से राज्य को भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री के इस बयान से यह साफ होता है कि बिहार की बाढ़ की समस्या केवल राज्य के भीतर होने वाली बारिश से नहीं, बल्कि पड़ोसी क्षेत्रों में जलग्रहण क्षेत्रों (कैचमेंट एरिया) में होने वाली बारिश से भी सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।
नदियों की निरंतर निगरानी और क्षति आकलन का निर्देश
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे नदियों की मौजूदा स्थिति और बाढ़ से हुए नुकसान पर लगातार नजर रखें। उन्होंने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान का एक प्रारंभिक लेकिन विस्तृत आकलन रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार कर सरकार को सौंपी जाए, ताकि प्रभावित इलाकों में राहत, पुनर्वास और आवश्यक विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि आपदा प्रबंधन विभाग सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए बाढ़ से हुए नुकसान और पुनर्निर्माण में आने वाली लागत का आकलन करे और इस रिपोर्ट को जल्द से जल्द तैयार करे। इसके साथ ही अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जो नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं, जैसे सड़कों को नुकसान, बीमारियों का फैलाव या पेयजल संकट, उनके लिए भी पहले से तैयारी रखी जाए।
आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव ने दी राहत कार्यों की जानकारी
बैठक के दौरान आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने बाढ़ के दौरान चलाए गए राहत और बचाव कार्यों का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सामुदायिक रसोई और राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, प्रशासन की ओर से 1,089 सामुदायिक रसोई और 13 राहत शिविर चलाए जा रहे हैं, जहां बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन और आश्रय की सुविधा मुहैया कराई जा रही है।
केंद्र सरकार और वायुसेना का विशेष सहयोग
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर केंद्र सरकार के प्रति आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना का विशेष रूप से धन्यवाद किया, जिन्होंने इस चुनौतीपूर्ण समय में बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। जानकारी के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के विभिन्न दस्तों के पायलट और जवान इस विशेष राहत अभियान में सक्रिय रूप से शामिल रहे, खासकर उन दुर्गम और पानी से घिरे इलाकों में, जहां सड़क मार्ग से राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल था।
इससे पहले सारण जिले में भी मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिया था कि बाढ़ प्रभावित और दुर्गम इलाकों में राहत सामग्री की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के समन्वय से विशेष एयर-ड्रॉपिंग यानी हवाई मार्ग से राहत सामग्री गिराने का अभियान भी चलाया गया, ताकि पानी से घिरे गांवों तक मदद पहुंच सके।
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद नितिन नवीन भी मौजूद रहे। उनकी इस बैठक में उपस्थिति इस बात का संकेत है कि बाढ़ प्रबंधन के मुद्दे को पार्टी और सरकार दोनों स्तर पर बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है, और इसे केवल प्रशासनिक मामला न मानकर राजनीतिक नेतृत्व भी इसकी सीधी निगरानी कर रहा है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे से पहले मांगी गई रिपोर्ट
मुख्यमंत्री का यह निर्देश एक अहम घटनाक्रम से पहले आया है। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक केंद्रीय टीम बिहार का दौरा कर बाढ़ की स्थिति का आकलन करने वाली है। इसी दौरे से पहले मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे बाढ़ से जुड़े नुकसान पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार रखें, ताकि केंद्रीय टीम के सामने राज्य की वास्तविक स्थिति को सटीक आंकड़ों के साथ प्रस्तुत किया जा सके।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया था कि दुर्गा पूजा से पहले बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर पूरी कर ली जाए और फसलों को हुए नुकसान का आकलन भी प्राथमिकता से किया जाए। उन्होंने जिला प्रशासन को यह भी निर्देश दिया था कि प्रभावित परिवारों और किसानों की पहचान सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी पात्र परिवार को राहत से वंचित न रहना पड़े।
8.27 लाख परिवारों को मिल चुकी है 579 करोड़ की राहत राशि
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इससे पहले भी बाढ़ राहत को लेकर कई बड़े कदम उठा चुके हैं। बीते दिनों उन्होंने पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राज्य के 15 जिलों में फैले 8.27 लाख बाढ़ प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में कुल 579.23 करोड़ रुपये की राहत राशि सीधे हस्तांतरित की थी। इस योजना के तहत प्रत्येक प्रभावित परिवार को 7,000 रुपये की सहायता राशि दी गई।
आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इस साल की बाढ़ से राज्य में करीब 49.72 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, और बीते दो-तीन दिनों में हुई भारी बारिश के कारण कई नदियां लगातार उफान पर बनी हुई थीं। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर यह भी दोहराया था कि राज्य सरकार बिहार में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए लगातार प्रयासरत है।
बाढ़ का दायरा: आधे से अधिक राज्य पर असर
बिहार में बाढ़ की यह समस्या नई नहीं है, लेकिन इस साल इसका दायरा और तीव्रता दोनों ही चिंताजनक रही। राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार की बाढ़ ने राज्य के आधे से अधिक हिस्से को प्रभावित किया, जिसमें भवनों, फसलों, सड़कों, नहरों और तटबंधों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई जगहों पर ट्रेन परिचालन भी बाधित हुआ। तटबंधों को हुए व्यापक नुकसान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया, क्योंकि नदियों में भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने और नदियों में भारी गाद (सिल्टिंग) जमा होने से समस्या और बढ़ गई।
बाढ़ की पुरानी चुनौती और स्थायी समाधान की तलाश
बिहार के लिए बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। राज्य के उत्तरी हिस्से में बहने वाली नदियां, जो ज्यादातर नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों से निकलती हैं, हर साल मानसून के दौरान बिहार के बड़े हिस्से को प्रभावित करती रही हैं। पूर्व में भी राज्य सरकार केंद्र से विशेषज्ञों की टीम भेजे जाने और गंगा बेसिन में बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए अध्ययन कराए जाने की मांग करती रही है। हालांकि अब तक इस समस्या का कोई स्थायी और पूर्ण समाधान नहीं निकल पाया है, जिसकी वजह से लगभग हर साल राज्य को बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान का सामना करना पड़ता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी समीक्षा बैठक में इस पुरानी चुनौती को स्वीकार करते हुए यह संकेत दिया कि सरकार अब केवल तात्कालिक राहत तक सीमित न रहकर दीर्घकालिक और स्थायी समाधान की दिशा में भी गंभीरता से काम करना चाहती है।
क्षति आकलन रिपोर्ट क्यों है महत्वपूर्ण
किसी भी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद विस्तृत क्षति आकलन रिपोर्ट की भूमिका बेहद अहम होती है। यह रिपोर्ट न केवल राज्य सरकार को यह समझने में मदद करती है कि किन क्षेत्रों में कितना नुकसान हुआ है, बल्कि यह केंद्र सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता या विशेष पैकेज की मांग करने का आधार भी बनती है। पूर्व के बाढ़ प्रकरणों में भी देखा गया है कि राज्य सरकार तबाही की गंभीरता के आधार पर केंद्र से हजारों करोड़ रुपये की सहायता का अनुरोध कर चुकी है।
ऐसे में मुख्यमंत्री का यह निर्देश कि रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार की जाए, आने वाले समय में राज्य को केंद्र से मिलने वाली सहायता और राहत कार्यों की गति, दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे की राह
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा तैयार की जा रही यह विस्तृत रिपोर्ट कितनी जल्दी पूरी होती है, और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली टीम के दौरे के दौरान इसे किस तरह प्रस्तुत किया जाता है। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि दुर्गा पूजा से पहले क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और फसल क्षति के आकलन का काम कितनी तेजी से पूरा होता है, और प्रभावित परिवारों तक राहत राशि किस रफ्तार से पहुंचती है।
फिलहाल राज्य सरकार की प्राथमिकता साफ है — राहत कार्यों में किसी तरह की ढिलाई न बरतते हुए बाढ़ प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सहायता पहुंचाना और भविष्य में इस तरह की तबाही को रोकने के लिए ठोस और स्थायी रणनीति तैयार करना।
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