सम्राट कैबिनेट की बैठक: शिक्षा से लेकर पुलिस आधुनिकीकरण तक 24 बड़े फैसलों को मंजूरी
बिहार कैबिनेट ने 23 सितंबर 2026 को सीएम सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 24 फैसलों को मंजूरी दी — दो नए विश्वविद्यालय, 50 ड्रोन खरीद, पटना निगम का ₹41 करोड़ ऋण माफ, बिजली बोर्ड कर्मियों को ₹757 करोड़, डेयरी व स्वास्थ्य योजनाओं को भी स्वीकृति मिली।
सम्राट कैबिनेट की बैठक: शिक्षा से लेकर पुलिस आधुनिकीकरण तक 24 बड़े फैसलों को मंजूरी
पटना, 23 सितंबर 2026 (बुधवार): मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार अपराह्न 4 बजे पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में मंत्रिपरिषद की अहम बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में शिक्षा, ऊर्जा, गृह, जल संसाधन, डेयरी एवं पशु संसाधन, नगर विकास, राजस्व, श्रम संसाधन, स्वास्थ्य, विधि तथा मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग सहित कुल 11 विभागों से जुड़े 24 प्रस्तावों पर विचार किया गया, और सभी प्रस्तावों को कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई। बैठक की अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की और कैबिनेट सचिवालय विभाग द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति (संख्या 46-(08)-21-2026) में सभी निर्णयों का ब्योरा साझा किया गया।
यह बैठक इस मायने में खास रही कि इसमें उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दो नए विश्वविद्यालयों की स्थापना, ऊर्जा क्षेत्र में सैकड़ों करोड़ रुपये की देनदारी के निपटारे, पुलिस बल के आधुनिकीकरण, पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र के विस्तार, तथा जेल सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले एक साथ लिए गए। नीचे सभी 24 निर्णयों का विस्तृत विवरण दिया जा रहा है।
उच्च शिक्षा विभाग: दो नए विश्वविद्यालयों को मंजूरी
कैबिनेट बैठक की शुरुआत उच्च शिक्षा विभाग के दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों से हुई। पहला निर्णय बेगूसराय जिले में रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़ा है। बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 की धारा 3 की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर बेगूसराय जिले के सिमरिया गांव के निवासी थे और हिंदी साहित्य में उनका योगदान अविस्मरणीय माना जाता है। उन्हीं की स्मृति में स्थापित होने वाले इस विश्वविद्यालय की स्थापना और उसके पदाधिकारियों तथा कर्मियों के वेतनादि व्यय हेतु सरकार ने ₹15,00,00,000 (पंद्रह करोड़ रुपये) की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। यह विश्वविद्यालय क्षेत्र के छात्रों को उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ बेगूसराय को शिक्षा के एक नए केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
दूसरा निर्णय पटना में प्रस्तावित विश्वविद्यालय के नामकरण से संबंधित रहा। इसी अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (1) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए कैबिनेट ने "माँ सीता विश्वविद्यालय" के स्थान पर उसका नाम संशोधित कर "माता सीता विश्वविद्यालय" किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। इस विश्वविद्यालय की स्थापना और इसके पदाधिकारियों एवं कर्मियों के वेतनादि व्यय के लिए भी ₹15,00,00,000 (पंद्रह करोड़ रुपये) की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। यह विश्वविद्यालय पटना में स्थापित किया जाएगा और इसे भी बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के अंतर्गत गठित किया जा रहा है।
इन दोनों निर्णयों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार नए विश्वविद्यालयों की स्थापना के माध्यम से उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार करने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है, जिससे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों को उनके निकट ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध हो सके।
ऊर्जा विभाग: विद्युत बोर्ड कर्मियों के टर्मिनल बेनिफिट का निपटारा
ऊर्जा विभाग से जुड़ा एक अहम प्रस्ताव भी इस बैठक में पारित हुआ, जो पूर्ववर्ती बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के हितों से सीधे जुड़ा है। कैबिनेट ने 31 अक्टूबर 2012 तक की अवधि में इन कर्मचारियों के अनफंडेड टर्मिनल बेनिफिट दायित्व के विरुद्ध वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उपबंधित राशि ₹757.63 करोड़ (सात सौ सत्तावन करोड़ तिरसठ लाख रुपये) बिहार स्टेट पावर (होल्डिंग) कंपनी लिमिटेड को पांच समान किश्तों में उपलब्ध कराने की स्वीकृति प्रदान की।
यह निर्णय उन हजारों पूर्व कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है जो वर्षों से अपने सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान का इंतजार कर रहे थे। विद्युत बोर्ड के पुनर्गठन के बाद से टर्मिनल बेनिफिट का यह मामला लंबित चला आ रहा था, और अब किश्तों में भुगतान सुनिश्चित होने से बकाया राशि के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। यह कदम ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
गृह विभाग: पुलिस आधुनिकीकरण और सुरक्षा उपकरणों की खरीद
गृह विभाग से संबंधित दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी, जो राज्य में कानून-व्यवस्था और पुलिस बल की क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
पहला निर्णय जिला पुलिस, रेल पुलिस, बिहार सैन्य पुलिस (बि.उ.स.पु.), मध्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, बिहार तथा लोक भवन के उपयोग के लिए आवश्यक उपकरणों एवं उपस्करों की खरीद से संबंधित है। इसके लिए कुल प्राक्कलित राशि ₹3368.50 लाख (तैंतीस करोड़ अड़सठ लाख पचास हजार रुपये) की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। यह राशि पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण, गश्त, सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए जरूरी संसाधनों की खरीद पर खर्च की जाएगी।
दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण निर्णय केंद्र प्रायोजित "पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता योजना" (ASUMP) के अंतर्गत लिया गया। इस योजना के तहत भीड़ नियंत्रण एवं प्रबंधन (Crowd Control & Management), रिवराइन/नक्सल विरोधी अभियान (Riverine/Naxals Anti-crime Operations), आपदा प्रबंधन (Disaster Management) आदि जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य में कुल 50 अदद ड्रोन की खरीद को मंजूरी दी गई है। इसके लिए कुल लागत राशि ₹2450.00 लाख (चौबीस करोड़ पचास लाख रुपये) की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से पुलिस को दुर्गम इलाकों, बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी करने में काफी मदद मिलेगी, साथ ही बड़े आयोजनों और मेलों में भीड़ प्रबंधन भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
जल संसाधन विभाग: नई कंपनी के गठन को मंजूरी
जल संसाधन विभाग के अंतर्गत एक संरचनात्मक और दीर्घकालिक महत्व का निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने कंपनी एक्ट-2013 (Companies Act-2013) के तहत मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन एवं आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन सहित "बिहार जल संसाधन विकास निगम लिमिटेड" (Bihar Jal Sansadhan Vikas Nigam Limited) के गठन को स्वीकृति दी है। इस नई कंपनी के गठन से राज्य में सिंचाई परियोजनाओं, बाढ़ नियंत्रण कार्यों तथा जल संसाधन प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक व्यावसायिक और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित हो सकेगा। कंपनी के रूप में कार्य करने से निधियों के आवंटन, परियोजनाओं की निगरानी और उनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं गति दोनों बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग: पशुपालकों के लिए कई बड़ी योजनाएं
इस बैठक में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग से जुड़े सबसे अधिक यानी छह प्रस्ताव शामिल थे, जो दर्शाता है कि राज्य सरकार पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के विकास को लेकर कितनी गंभीर है।
पहला निर्णय "मुख्यमंत्री गौधन विकास ऋण योजना" से जुड़ा है। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक अर्थात आगामी तीन वर्षों में राज्य स्कीम की स्वीकृति हेतु कुल ₹1,60,00,10,000 (एक सौ साठ करोड़ दस हजार रुपये) की अनुमानित लागत व्यय की स्वीकृति दी गई। यह योजना पशुपालकों को गौपालन एवं दुग्ध उत्पादन बढ़ाने हेतु ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाई गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आय में वृद्धि हो सके।
दूसरा निर्णय "सात निश्चय-3" कार्यक्रम के अंतर्गत कोसी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण योजना से जुड़ा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 एवं 2027-28 में ₹1,26,07,00,000 (एक अरब छब्बीस करोड़ सात लाख रुपये) की अनुमानित लागत पर कॉम्फेड, पटना द्वारा कोसी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड, सुपौल के अंतर्गत सुपौल, मधेपुरा एवं सहरसा जिलों में डेयरी विकास की योजना स्वीकृत की गई। इसके अंतर्गत दही प्लांट, प्रीमियम आइसक्रीम प्लांट, टोटल मिक्स्ड राशन (TMR) प्लांट, भैंस हीफर फार्म, सेक्स सॉर्टेड सीमेन, नवीन दुग्ध सहकारी समितियों (DCS) का गठन, मिल्क चिलिंग प्लांट एवं इंस्टेंट मिल्क चिलिंग सिस्टम की स्थापना की जाएगी। यह योजना कोसी क्षेत्र में डेयरी उद्योग को नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है, क्योंकि यह इलाका पहले से दूध उत्पादन के लिए जाना जाता है और इस योजना से यहां आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार होगा।
तीसरा निर्णय राज्यव्यापी पशु चिकित्सा सेवाओं से जुड़ा है। कैबिनेट ने बिहार राज्य में पशु चिकित्सा सेवाओं के विस्तार, सुदृढ़ीकरण एवं मानकीकरण हेतु "बिहार पशु चिकित्सा अवसंरचना एवं सेवा सुदृढ़ीकरण नीति" को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की। यह नीति राज्यभर में पशु चिकित्सा केंद्रों के नेटवर्क को मजबूत करने और पशुपालकों को बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
चौथा निर्णय बिहार राज्य मछुआरा आयोग से संबंधित है, जिसमें आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों के मानदेय एवं अन्य सुविधाओं के पुनर्निर्धारण को मंजूरी दी गई। इससे आयोग के पदाधिकारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे वे मछुआरा समुदाय के हितों के लिए अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।
पांचवां निर्णय केंद्र सरकार की मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) योजना से जुड़ा है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27, 2027-28 एवं 2028-29 में इस कोष के तहत "ट्रांसफॉर्मिंग सीवान वेटलैंड्स क्लस्टर टू एन इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर एंड एक्सपोर्ट ओरिएंटेड वैल्यू चेन इन द स्टेट ऑफ बिहार" नामक योजना, जो सीवान जिले के बसंतपुर, भगवानपुर हाट एवं गोरियाकोठी प्रखंडों में लागू होगी, हेतु ₹1,95,28,00,000 (एक सौ पंचानवे करोड़ अट्ठाईस लाख रुपये) की लागत पर योजना की स्वीकृति दी गई। इस योजना का उद्देश्य सीवान के वेटलैंड्स क्षेत्रों को एकीकृत जलीय कृषि और निर्यातोन्मुखी मूल्य श्रृंखला में बदलना है, जिससे स्थानीय मत्स्य पालकों को नई तकनीक, बाजार तक पहुंच और अधिक आय के अवसर प्राप्त हों।
छठा और अंतिम निर्णय इसी विभाग से जुड़ा केंद्रीय प्रायोजित स्कीम "पशुधन गणना एवं एकीकृत न्यादर्श सर्वेक्षण" से संबंधित है। इसके अंतर्गत "एकीकृत न्यादर्श सर्वेक्षण की योजना" के तहत राज्य में दुग्ध, अंडा, मांस एवं ऊन उत्पादन का अनुमान लगाने के लिए विभिन्न कोटि के कुल 81 (इक्यासी) पदों के सृजन हेतु वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुल ₹5,21,73,000 (पांच करोड़ इक्कीस लाख तिहत्तर हजार रुपये) के व्यय पर योजना की स्वीकृति दी गई। इससे राज्य में पशुधन और उससे जुड़े उत्पादों के सटीक आंकड़े जुटाने में मदद मिलेगी, जो नीति निर्माण के लिए आवश्यक हैं।
नगर विकास एवं आवास विभाग: पटना नगर निगम को राहत और सब-वे का नामकरण
नगर विकास एवं आवास विभाग से जुड़े दो निर्णय भी बैठक में लिए गए। पहला निर्णय पटना नगर निगम से संबंधित है। वर्ष 1993-94 से 2004-2005 तक नगर निगम, पटना को उसके निकाय कर्मियों के वेतनादि भुगतान हेतु बिहार सरकार द्वारा ऋण के रूप में दी गई राशि ₹41,00,41,074 (एकतालीस करोड़ एकतालीस हजार चौहत्तर रुपये) को अनुदान के रूप में समायोजित करते हुए उसके उपयोगिता प्रमाण पत्र/व्यय प्रमाण पत्र (UC/DC) की अनिवार्यता को शिथिल किए जाने की स्वीकृति दी गई। यह निर्णय पटना नगर निगम के लिए बड़ी वित्तीय राहत माना जा रहा है, क्योंकि दशकों पुराने इस ऋण के अनुदान में तब्दील होने से निगम पर वित्तीय बोझ कम होगा।
दूसरा निर्णय पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़ा है, जिसमें जीपीओ गोलंबर के नजदीक मल्टी-मॉडल हब को पटना जंक्शन से जोड़ने हेतु निर्मित भूमिगत रास्ते (सब-वे) का आधिकारिक नामकरण "आचार्य किशोर कुणाल सब-वे" किए जाने की स्वीकृति दी गई। आचार्य किशोर कुणाल बिहार के जाने-माने पूर्व आईपीएस अधिकारी और सामाजिक-धार्मिक क्षेत्र में अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध रहे हैं, विशेषकर महावीर मंदिर न्यास और पटना के सामाजिक कार्यों में उनकी भूमिका को देखते हुए यह नामकरण उनके प्रति सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग: तीन जिलों में भूमि हस्तांतरण को मंजूरी
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े तीन प्रस्तावों को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी, जो अलग-अलग जिलों में भूमि हस्तांतरण से संबंधित हैं।
पहला निर्णय नवादा जिले के अंचल-वारिसलीगंज, मौजा-मकनपुर, थाना संख्या-474, खाता संख्या-927 एवं 926 की कुल प्रस्तावित रकवा 99.39 एकड़ अनावाद सर्वसाधारण एवं अनावाद बिहार सरकार की भूमि को चीनी मिल की स्थापना हेतु गन्ना उद्योग विभाग, बिहार, पटना को अंतर्विभागीय स्थायी नि:शुल्क हस्तांतरण किए जाने से संबंधित है। इस भूमि पर नई चीनी मिल स्थापित होने से क्षेत्र में रोजगार सृजन और गन्ना किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
दूसरा निर्णय कटिहार जिले के अंचल-कटिहार, मौजा-दलन, थाना संख्या-77 की कुल प्रस्तावित रकवा 35 डिसमिल सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की स्वामित्व वाली भूमि को आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) पोस्ट कार्यालय-सह-आवासीय परिसर के निर्माण हेतु सशुल्क आधार पर कुल राशि ₹99,75,000 (निन्यानवे लाख पचहत्तर हजार रुपये) के भुगतान पर गृह मंत्रालय, भारत सरकार को स्थायी हस्तांतरण से संबंधित है।
तीसरा निर्णय जहानाबाद जिले के अंचल-जहानाबाद, मौजा-एरकी, थाना संख्या-346, खाता संख्या-470, खेसरा संख्या-948 की कुल प्रस्तावित रकवा 17.02 डिसमिल कैसर-ए-हिंद की भूमि एसआईबी (स्टेट इंटेलिजेंस ब्यूरो) के कार्यालय-सह-आवासीय भवन के निर्माण हेतु सशुल्क आधार पर कुल राशि ₹1,07,22,600 (एक करोड़ सात लाख बाईस हजार छह सौ रुपये) के भुगतान पर गृह मंत्रालय, भारत सरकार को स्थायी हस्तांतरण से संबंधित है। ये तीनों निर्णय केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और राज्य के औद्योगिक विकास दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग: बॉयलर नियमावली को मंजूरी
श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के अंतर्गत बिहार बॉयलर (जांच, न्यायनिर्णयन एवं अपील) नियमावली, 2026 की स्वीकृति दी गई। यह नियमावली राज्य में औद्योगिक इकाइयों में उपयोग होने वाले बॉयलरों की जांच, दुर्घटना की स्थिति में न्यायनिर्णयन तथा अपील प्रक्रिया को नियमित और सुव्यवस्थित करेगी, जिससे औद्योगिक सुरक्षा मानकों में सुधार होगा और श्रमिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
सामान्य प्रशासन विभाग: शहीद सैनिक की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति
एक भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण निर्णय सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत लिया गया। युद्ध एवं युद्ध जैसी स्थिति में शहीद हुए सूबेदार संतोष कुमार की आश्रित पत्नी श्रीमती कनक कुमारी को अनुकंपा के आधार पर बिहार सरकार में नियुक्ति देने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने स्वीकृति दी। यह निर्णय शहीद सैनिकों के परिवारों के प्रति राज्य सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
स्वास्थ्य विभाग: e-Sushrut NX एप्लिकेशन का विस्तार
स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा निर्णय राज्य के स्वास्थ्य ढांचे के डिजिटलीकरण से संबंधित है। कैबिनेट ने राज्य के 12 चिकित्सीय संस्थानों में नामांकन के आधार पर सी-डैक (C-DAC) द्वारा विकसित e-Sushrut NX Application को लागू करने की स्वीकृति दी। इस पर 3 वर्षों के लिए होने वाले व्यय की राशि ₹29,79,85,000 (उनतीस करोड़ उनासी लाख पचासी हजार रुपये) की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है, तथा कार्य संतोषप्रद रहने की स्थिति में आगामी 2 वर्षों के लिए ₹10,98,39,000 (दस करोड़ अट्ठानबे लाख उनतालीस हजार रुपये) की लागत पर योजना की अवधि विस्तार किए जाने को भी मंजूरी दी गई। यह अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली राज्य के अस्पतालों में मरीजों के रिकॉर्ड रखने, इलाज की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने और चिकित्सा सेवाओं को अधिक पारदर्शी एवं कुशल बनाने में मददगार साबित होगी।
विधि विभाग: गांधी जयंती पर बंदियों की रिहाई
विधि विभाग के अंतर्गत एक मानवीय दृष्टिकोण वाला निर्णय लिया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 को एक बारगी उपाय (वन टाइम मेजर) के तहत दोषसिद्ध बंदियों को परिहार का लाभ देकर कारामुक्त करने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने स्वीकृति दी। इस निर्णय के तहत अच्छे आचरण वाले और निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले बंदियों को रिहाई का लाभ मिलेगा, जो हर साल गांधी जयंती के अवसर पर एक परंपरा के रूप में लिया जाने वाला निर्णय है।
गृह विभाग (कारा): सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में नियम संशोधन
गृह विभाग के कारा प्रभाग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय भी बैठक में लिया गया। SMWP (Civil) No(s).-10/2024, Re: Discrimination Inside Prisons In India के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा दिनांक 30.07.2026 एवं 10.09.2026 को पारित आदेश के आलोक में बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-743 में संशोधन की स्वीकृति दी गई। यह संशोधन देश की जेलों में भेदभाव संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में किया जा रहा है, जिससे बिहार की जेलों में बंदियों के साथ किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार को समाप्त किया जा सके और जेल सुधार की दिशा में राज्य आगे बढ़ सके।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग: समन्वय पोर्टल और वेतन-भत्ता संशोधन
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग से जुड़े दो निर्णय भी इस बैठक में लिए गए। पहला निर्णय बिहार सरकार के विभिन्न विभागों के भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में लंबित मामलों के प्रभावी अनुश्रवण एवं समन्वय हेतु "समन्वय पोर्टल" विकसित किए जाने के निमित्त बिहार वित्त (संशोधन) नियमावली, 2024 के नियम-131ड़ (त) के तहत नामांकन के आधार पर NIC (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र) का चयन किए जाने की स्वीकृति से संबंधित है। इस पोर्टल के माध्यम से राज्य सरकार के विभागों के केंद्र सरकार में लंबित मामलों की स्थिति पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी, जिससे मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।
दूसरा निर्णय बिहार सरकार के विभिन्न विभागों के अंतर्गत गठित आयोग, बोर्ड, निगम, पर्षद, समितियों आदि के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं अन्य महानुभाव, जिन्हें मंत्री/राज्य मंत्री/उप मंत्री की सुविधा अनुमान्य है, उनके वेतन, दैनिक भत्ता एवं आतिथ्य भत्ता में संशोधन से संबंधित है। इस संशोधन से इन पदाधिकारियों को समय के अनुसार उचित वेतन एवं भत्ते मिल सकेंगे।
समग्र आकलन
कुल मिलाकर बुधवार को हुई इस कैबिनेट बैठक में लिए गए 24 फैसले राज्य सरकार के विकास एजेंडे की व्यापकता को दर्शाते हैं। एक ओर जहां शिक्षा के क्षेत्र में दो नए विश्वविद्यालयों की स्थापना और स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटलीकरण जैसे दीर्घकालिक निर्णय लिए गए, वहीं दूसरी ओर पुलिस आधुनिकीकरण, जेल सुधार, पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र के विस्तार तथा शहीद सैनिक परिवार को सहायता जैसे जनकल्याणकारी और संवेदनशील निर्णय भी शामिल रहे। ऊर्जा क्षेत्र में पुराने कर्मचारियों की लंबित देनदारी का निपटारा और नगर निगम के ऋण को अनुदान में बदलना वित्तीय राहत के महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत है कि आगामी महीनों में इन सभी योजनाओं के क्रियान्वयन पर तेजी से काम शुरू किया जाएगा।
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