जमुई कांड में CM सम्राट चौधरी का क्विक एक्शन, 48 घंटे में मुख्य आरोपी का एनकाउंटर
जमुई में नाबालिग छात्रा से बदसलूकी मामले में बिहार पुलिस ने 48 घंटे में 7 आरोपी गिरफ्तार किए। CM सम्राट चौधरी की सीधी निगरानी में हुई कार्रवाई में मुख्य आरोपी के पैर में गोली लगी। मामले से जुड़े कुछ दावे अभी अपुष्ट हैं, जांच जारी है।
जमुई/पटना, 22 सितंबर 2026: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार पुलिस ने जमुई मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई की एक नई मिसाल पेश की है। जिन मामलों में हफ़्तों लग जाते हैं, वहां मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की सीधी मॉनिटरिंग और पुलिस की तत्परता से महज 48 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी को घुटनों पर ला दिया।

आइये इस पूरे घटनाक्रम पर एक नज़र डालते है और जानते है कैसे पुलिस ने आरोपियों को दबोचा।
जमुई कांड का पूरा घटनाक्रम
19 सितंबर : करीब 7 बजे शाम में जमुई-लखीसराय रोड पर कोचिंग से लौट रही 10वीं की छात्रा और उसके दोस्त को कुछ असामाजिक तत्वों ने जबरन रोका और बदसलूकी की। छात्रा के साथ घिनोना कार्य हुआ, पर डर और सामाजिक संकोच के कारण पीड़ित परिवार ने तुरंत थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कराई।
20 सितंबर : अपराधियों ने ना सिर्फ बदसुलिकी की, उसका वीडियो भी बनाया और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। वीडियो तुरंत वायरल होने लगा और पुलिस तक रात में खबर पहुंची।
21 सितंबर : सोमवार की सुबह ये वीडियो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तक पहुंचा और उन्होंने तुरंत जमुई पुलिस को FIR करके सख्त कार्रवाई के निर्देश दिये, क्योंकि पीड़िता ने शिकायत नहीं की थी तो पुलिस ने स्वत संज्ञान लिया और FIR दर्ज करके कार्रवाई शुरू की।
21 सितंबर (दोपहर - गोपनीय बयान): पुलिस की एक विशेष टीम पीड़िता के घर पहुंची। सुरक्षा और गोपनीयता का पूरा ध्यान रखते हुए पीड़िता का कॉन्फिडेंशियल स्टेटमेंट (Confidential Statement) दर्ज किया गया।
21 सितंबर (शाम - 3 घंटे में पहली सफलता): बयान दर्ज होने और आरोपियों की पहचान होने के महज 3 घंटे के भीतर पुलिस की एसआईटी (SIT) ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर 3 आरोपियों को दबोच लिया।
22 सितंबर (मंगलवार सुबह - हाफ एनकाउंटर): घटना के 48 घंटे के भीतर, जब पुलिस टीम मुख्य आरोपी नंदन यादव को पकड़ने प्रतापपुर के बहियार (खेतों) पहुंची, तो उसने भागने की कोशिश की। पुलिस ने साहसिक जवाबी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी नंदन यादव के पैर में गोली मारकरउसे गिरफ्तार कर लिया।
आगे बढ़ने से पहले आपको बता दे इस घटना में अभी तक पुलिस ने 7 लोगो को गिरफ्तार कर लिया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की लगातार मॉनिटरिंग
इस पूरे घटना पर इतनी तेजी से कार्रवाई होने का एक बड़ा कारण ये भी था कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद इस पर लगातार नज़र रखें हुए थे और पुलिस के संपर्क में थे, सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने सीधे कड़ी कार्रवाई का निर्देश जमुई पुलिस को दिया था और 72 घंटे के अंदर सारे अपराधियों को गिरफ्तार करने के भी निर्देश दिये गये थे।
सम्राट चौधरी ने बिना किसी शोर-शराबे के 'जस्टिस डिलीवर्ड' (त्वरित न्याय) के सिद्धांत पर काम करके दिखा दिया। सरकार की ओर से स्पष्ट संदेश है कि बिहार में किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
षड्यंत्र का पर्दाफाश: राजद कनेक्शन और भगवा गमछे का सच।
ये मामले में जैसे जैसे जांच चल रही है, बहुत सी बातें बाहर आ रही है। बहुत से लोगों को ये अब एक राजनीतिक षड्यंत्र भी लग रहा है।
दरअसल, जांच में यह सामने आया है कि मुख्य आरोपी नंदन यादव के राजद कार्यकर्ता होने की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ आरोपी का पारिवारिक बैकग्राउंड भी आपराधिक रहा है और उसके पिता (गनौरी यादव) पर पहले से ही आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं।
सनातन और हिंदुत्व को बदनाम करने की साजिश - आम जनता के बीच यह चर्चा तेज है कि आरोपी ने जानबूझकर भगवा गमछे का इस्तेमाल किया, ताकि इस घिनौने काम की आड़ में हिंदुत्व और सनातन को बदनाम किया जा सके और इसे एक अलग रंग दिया जा सके।
सुशासन का भरोसा
इस त्वरित कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि राज्य में अब अपराधियों के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। आरोपी किसी भी रसूखदार राजनीतिक दल से जुड़ा हो कानून का शिकंजा उसे पाताल से भी ढूंढ निकालेगा। सम्राट सरकार का यह सख्त कदम बिहार में भयमुक्त समाज और महिला सुरक्षा के संकल्प को धरातल पर साबित करता है। बिहार में अब सिर्फ और सिर्फ 'कानून का राज' चलेगा।
No comments yet. Be the first to share your thoughts!