गया जी-पुनपुन में आज से 17 दिवसीय ऐतिहासिक पितृपक्ष मेला शुरू, CM सम्राट चौधरी ने किया उद्घाटन

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गया जी में 17 दिवसीय पितृपक्ष मेले का उद्घाटन किया। श्रद्धालुओं के लिए 'पिंडदान गया जी' ऐप, 2,500 बेड की टेंट सिटी, 150 निःशुल्क ई-रिक्शा और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

गया जी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा 17 दिवसीय पितृपक्ष मेला 2026 के उद्घाटन की तस्वीर, विष्णुपद मंदिर और देवघाट पर श्रद्धालु
गया: विष्णुपद मंदिर परिसर में पितृपक्ष मेला 2026 के उद्घाटन अवसर

गया, 25 सितंबर। बिहार के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गया जी और पुनपुन में आज से विश्व प्रसिद्ध 17 दिवसीय पितृपक्ष मेला 2026 का भव्य शुभारंभ हो गया। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलने वाले इस ऐतिहासिक मेले का विधिवत उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले ऐतिहासिक विष्णुपद मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीहरि विष्णु के चरण-चिह्नों के दर्शन-पूजन किए, इसके बाद औपचारिक रूप से मेले का उद्घाटन किया। उद्घाटन के पश्चात मुख्यमंत्री गांधी मैदान पहुंचे, जहां उन्होंने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया।

गौरतलब है कि राजकीय मेले का दर्जा मिलने के बाद यह पहला अवसर है जब करीब 12 वर्षों बाद किसी मुख्यमंत्री ने स्वयं इस मेले का उद्घाटन किया है। इससे पहले वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने मेले का उद्घाटन और समापन दोनों किया था। इस ऐतिहासिक उद्घाटन सत्र में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार सरकार के नौ मंत्रियों समेत कई विशिष्ट अतिथि भी मौजूद रहे।

देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

पितृपक्ष मेला पितरों की मुक्ति और पिंडदान के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस वर्ष गया जी और पुनपुन में देश-विदेश से 20 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। श्रद्धालु विष्णुपद देवघाट सहित विभिन्न वेदियों और सरोवरों पर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण एवं पिंडदान का अनुष्ठान करेंगे। जिला प्रशासन के अनुसार, गया जी डैम से श्मशान घाट तक एक समय में करीब 40 से 50 हजार श्रद्धालु एक साथ पिंडदान कर सकेंगे। पिछले वर्ष बनाए गए विष्णुपथ क्षेत्र और सीता पद पर भी इस बार बड़े घाट तैयार किए गए हैं।

'पिंडदान गया जी' ऐप और वेबसाइट से डिजिटल सुविधा

इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने पारंपरिक इंतजामों के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल व्यवस्थाओं को भी जोड़ा है। 'पिंडदान गया जी' नाम से मोबाइल ऐप और आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की गई है, जिसके जरिए श्रद्धालु डिजिटल पंजीकरण करा सकेंगे। इस ऐप और वेबसाइट पर पिंडदान की विधि, होटल एवं ठहरने की जानकारी, यातायात मार्ग तथा इमरजेंसी सेवाओं से जुड़ी सभी जानकारियां अब एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी। इसके अतिरिक्त, यह ऐप शिकायत निवारण का भी माध्यम बना है—जिला प्रशासन ने सभी तैनात दंडाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को अपने मोबाइल में यह ऐप डाउनलोड करने का निर्देश दिया है, ताकि तीर्थयात्रियों की समस्याओं और शिकायतों का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

2,500 बेड की टेंट सिटी और 150 निःशुल्क ई-रिक्शा

दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए इस बार प्रशासन ने 2,500 बेड की क्षमता वाली टेंट सिटी तैयार की है, जिसमें आधुनिक सुविधाओं से युक्त आवासीय व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 150 निःशुल्क ई-रिक्शा की व्यवस्था भी की गई है, जो विभिन्न घाटों, वेदियों और ठहरने के स्थानों के बीच श्रद्धालुओं को नि:शुल्क पहुंचाएंगे। यह पहल विशेष रूप से बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी साबित होगी।

सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम

मेले के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए पूरे मेला क्षेत्र को 16 सुपर जोन, 45 जोन और 365 सेक्टर में विभाजित किया गया है। प्रत्येक क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, महिला दंडाधिकारी, महिला पुलिस बल तथा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। गया के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर और वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने संयुक्त रूप से तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी अधिकारियों को पूरी तत्परता, संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ ड्यूटी निभाने का निर्देश दिया है।

प्रमुख सरोवरों और घाटों पर एसडीआरएफ की टीम, प्रशिक्षित गोताखोर, लाइफ जैकेट और नावों की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत कार्य किया जा सके। भगदड़ जैसी स्थिति से बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मेला क्षेत्र में CCTV कैमरों और ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। विष्णुपद मंदिर के समीप एक अस्थाई थाने का भी निर्माण किया गया है, ताकि विधि-व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए वन-वे रूट, निर्धारित पार्किंग जोन और सख्त ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।

स्वास्थ्य, स्वच्छता और पेयजल पर विशेष ध्यान

श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मेला क्षेत्र में एम्बुलेंस सहित 24 घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। सार्वजनिक स्थलों और शिविरों में एम्बुलेंस व अन्य आपातकालीन सेवाओं के हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालु तुरंत नियंत्रण कक्ष से संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकें। इसके अलावा स्वच्छता एवं निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। मेला क्षेत्र में सुरक्षित और निर्बाध बिजली आपूर्ति के भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।

सरकार की प्राथमिकता में पितृपक्ष मेला

वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने पितृपक्ष मेला और सोनपुर मेला को राजकीय मेले का दर्जा दिया था, जिसके बाद से राज्य सरकार हर वर्ष इसकी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में जुटी है। जीतन राम मांझी लंबे समय से केंद्र सरकार से इस ऐतिहासिक मेले को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिए जाने की मांग भी करते रहे हैं। इस वर्ष मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा स्वयं मेले का उद्घाटन किया जाना और गांधी मैदान में भव्य जनसभा का आयोजन इस आयोजन को और बड़ा स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

श्रद्धालुओं के लिए क्यों खास है यह आयोजन

गया जी को हिंदू धर्म में पितरों की मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और वे मोक्ष को प्राप्त होते हैं। हर वर्ष पितृपक्ष के अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए गया जी पहुंचते हैं। इस बार प्रशासन द्वारा की गई डिजिटल और आधुनिक व्यवस्थाओं से श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में अधिक सुगमता, सुरक्षा और सुविधा मिलने की उम्मीद है। जिला प्रशासन का कहना है कि मेले की सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली गई हैं और श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हर स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है।

आने वाले 17 दिनों तक गया जी और पुनपुन में चलने वाला यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और डिजिटल गवर्नेंस के एक बड़े उदाहरण के रूप में भी देखा जा रहा है।

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