गया जी में निवेशकों के लिए उपलब्ध होगी 1,700 एकड़ जमीन, बिहार का लक्ष्य 20,000 करोड़ रुपये का निवेश

बिहार सरकार गया जी के दोभी स्थित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) में निवेशकों के लिए 1,700 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगी। राज्य को यहां करीब 20,000 करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश की उम्मीद है।

गया जी में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) के लिए 1,700 एकड़ भूमि, बिहार में 20,000 करोड़ रुपये निवेश की योजना दर्शाता चित्र
गया: दोभी में विकसित हो रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) की फाइल तस्वीर।

पटना/गया, 25 सितंबर। बिहार सरकार राज्य में औद्योगिक निवेश को नई रफ्तार देने की तैयारी में जुट गई है। गया जी जिले के दोभी प्रखंड में विकसित हो रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) में निवेशकों के लिए करीब 1,700 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह परियोजना बिहार में करीब 20,000 करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश को आकर्षित करेगी, जिससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बल मिलेगा।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में लोकसेवक भवन स्थित संकल्प सभागार में 'बिहार गति' पहल के तहत 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली अवसंरचना एवं कल्याणकारी परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की थी, जिसमें उद्योग विभाग को अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक गया जी के इस IMC को चालू करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया। साथ ही, हाल ही में गया जी में पितृपक्ष मेले की समीक्षा के दौरान भी मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष अक्टूबर माह से करीब 20,000 करोड़ रुपये का औद्योगिक निवेश धरातल पर उतरना शुरू हो जाएगा, जिससे नए रोजगार सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

क्या है गया जी का इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC)

गया जी का यह इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (Amritsar-Kolkata Industrial Corridor, AKIC) के तहत केंद्र सरकार के राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (National Industrial Corridor Development Programme) का एक प्रमुख नोड है। यह परियोजना गया रेलवे स्टेशन, एनएच-22, एनएच-19, गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, फतुहा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और पटना आईसीडी जैसे प्रमुख कनेक्टिविटी केंद्रों के नजदीक स्थित है, जिससे इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोभी में विकसित हो रहे इस क्लस्टर के पूरी तरह तैयार होने पर यह बिहार का सबसे बड़ा औद्योगिक टाउनशिप बन जाएगा।

केंद्रीय आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने 28 अगस्त 2024 को इस परियोजना को मंजूरी दी थी, जबकि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 18 मार्च 2025 को इसे पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान की। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 'बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड' (BIMCGL) नामक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) का गठन 6 जनवरी 2025 को किया गया। राज्य मंत्रिमंडल ने मार्च 2025 में इसे औद्योगिक क्षेत्र अधिसूचित करते हुए स्टांप शुल्क में छूट भी दी थी।

निवेश और रोजगार की संभावनाएं

रिपोर्टों के अनुसार, इस परियोजना पर कुल करीब 1,339 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें भूमि अधिग्रहण पर लगभग 462.14 करोड़ रुपये की लागत शामिल है। परियोजना पूरी होने के बाद यह क्लस्टर करीब 16,524 करोड़ रुपये के विनिर्माण निवेश को आकर्षित कर सकता है और 1.09 लाख से अधिक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है। हाल के आकलनों में सरकार ने कुल संभावित औद्योगिक निवेश का अनुमान बढ़ाकर करीब 20,000 करोड़ रुपये कर दिया है, जो आने वाले महीनों में चरणबद्ध ढंग से राज्य में आना शुरू होगा।

क्लस्टर में टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, फैब्रिकेशन तथा रक्षा उत्पादों सहित कई क्षेत्रों में निवेश की संभावना जताई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि यह औद्योगिक क्षेत्र 'प्लग-एंड-प्ले' इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तैयार किया जाए, ताकि निवेशकों को बिजली, पानी, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएं शुरू से ही उपलब्ध हों और वे बिना देरी के अपनी इकाइयां स्थापित कर सकें।

मुख्य सचिव और उद्योग विभाग की सक्रिय निगरानी

बिहार के मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने इससे पहले भी इस परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की थी और अधिकारियों को एजेंसी चयन की प्रक्रिया तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया था। चूंकि राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है, ऐसे में अब निर्माण एवं संचालन से जुड़े कार्यों में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हालिया समीक्षा बैठक में उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार को इस परियोजना को अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक चालू करने और आवश्यक सहायक अवसंरचना एवं उपयोगिता सेवाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया।

गया जी में समानांतर विकास परियोजनाएं भी गति में

गया जी में औद्योगिक विकास के साथ-साथ कई अन्य बड़ी परियोजनाओं पर भी काम तेजी से चल रहा है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में बताया कि विष्णुपद कॉरिडोर परियोजना पर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कुल 3,500 करोड़ रुपये खर्च करेंगे, जिसमें से करीब 2,500 करोड़ रुपये कॉरिडोर के विकास पर प्रस्तावित हैं। इसे राज्य में किसी मंदिर के विकास के लिए अब तक की सबसे बड़ी पहलों में से एक बताया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, सोन नदी से फल्गु नदी में पानी लाने की करीब 1,000 करोड़ रुपये की परियोजना पर भी काम जारी है, जिससे गया और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई व जलापूर्ति में सुधार होगा।

हवाई संपर्क के मोर्चे पर भी गया एयरपोर्ट को बिहार के प्रमुख हवाई अड्डों में गिना जा रहा है और इसे इंडोनेशिया, बैंकॉक, खाड़ी देशों जैसे प्रमुख वैश्विक गंतव्यों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों दोनों को बढ़ावा मिलेगा, जिसका सीधा लाभ IMC जैसी औद्योगिक परियोजनाओं को भी मिलेगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल बिहार के लिए

बिहार लंबे समय से औद्योगिक निवेश के मामले में देश के कई अन्य राज्यों से पीछे माना जाता रहा है। ऐसे में गया जी में तैयार हो रहा यह इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे से जुड़े होने के कारण इस क्लस्टर को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर कनेक्टिविटी और बाजार पहुंच का लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना तय समय-सीमा के भीतर पूरी होती है, तो इससे न केवल गया जी बल्कि पूरे दक्षिण बिहार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

राज्य सरकार का दावा है कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए स्टांप शुल्क में छूट सहित कई अन्य प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे इस परियोजना का बुनियादी ढांचा तैयार होगा, वैसे-वैसे बड़ी संख्या में घरेलू और वैश्विक निवेशकों के गया जी पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार की योजना है कि अक्टूबर माह से ही इस दिशा में ठोस प्रगति देखने को मिलनी शुरू हो जाए, जो बिहार के औद्योगिक भविष्य के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।

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