मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में पटना के रवींद्र भवन में दुर्गा स्वरोत्सव 2026 का शुभारंभ, तीन दिनों तक गूंजेगा शास्त्रीय संगीत!
पटना के रवींद्र भवन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में स्पिक मैके की ओर से तीन दिवसीय दुर्गा स्वरोत्सव 2026 का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन के साथ ही सुरों और शास्त्रीय संगीत के उत्सव की शुरुआत हो गई।

पटना। राजधानी पटना में सुरों और साधना के उत्सव की शुरुआत हो गई है। रवींद्र भवन में स्पिक मैके की ओर से आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव "दुर्गा स्वरोत्सव 2026" का शुभारंभ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में हुआ। उद्घाटन के साथ ही शास्त्रीय संगीत के इस उत्सव का आगाज़ हुआ, जो अगले तीन दिनों तक शहर के संगीत प्रेमियों को सुरों की दुनिया से जोड़े रखेगा।
सुरों के साथ उत्सव की शुरुआत
उद्घाटन समारोह के साथ ही रवींद्र भवन का माहौल संगीतमय हो उठा। आयोजकों के अनुसार यह महोत्सव तीन दिनों तक चलेगा और इस दौरान शास्त्रीय संगीत की विभिन्न प्रस्तुतियां होंगी। नवरात्र और दुर्गा पूजा के उत्सवी माहौल के बीच आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम को शहर के सांस्कृतिक कैलेंडर में खास स्थान मिल रहा है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति ने इस आयोजन को और खास बना दिया। राज्य के मुखिया की मौजूदगी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि बिहार में कला, संगीत और संस्कृति को महत्व दिया जा रहा है। शास्त्रीय संगीत प्रेमियों, विद्यार्थियों और कलाप्रेमियों के लिए यह आयोजन एक ऐसा मंच है, जहां वे भारतीय संगीत परंपरा को करीब से सुन और समझ सकते हैं।
इस सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन स्पिक मैके की ओर से किया जा रहा है। स्पिक मैके भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और संस्कृति को युवाओं तक पहुंचाने के लिए जाना जाने वाला संगठन है। संस्था की कोशिश रहती है कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे और शास्त्रीय कलाओं को सिर्फ सुने नहीं, बल्कि उन्हें महसूस भी करे।
दुर्गा स्वरोत्सव के जरिए भी यही संदेश दिया जा रहा है कि शास्त्रीय संगीत केवल मंच की प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक जीवंत विरासत है, जिसे संजोना और आगे बढ़ाना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
महोत्सव के तीन दिनों में शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों से रवींद्र भवन सजेगा। कार्यक्रम का मकसद श्रोताओं को शास्त्रीय संगीत की गहराई और सौंदर्य से रूबरू कराना है। इस तरह के आयोजन कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ श्रोताओं को भी वह अनुभव देते हैं, जो रोजमर्रा की भागदौड़ में कम ही मिल पाता है।
युवाओं को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने की पहल
आयोजन में बिहार में शास्त्रीय संगीत और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में कहा गया कि युवाओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत से जोड़ना आज की जरूरत है। डिजिटल दौर में जब मनोरंजन के अनगिनत विकल्प मौजूद हैं, तब शास्त्रीय संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसे मंचों की भूमिका और बढ़ जाती है।
युवाओं की भागीदारी से ही कोई भी सांस्कृतिक परंपरा आगे बढ़ती है। यही वजह है कि इस महोत्सव में युवा श्रोताओं और विद्यार्थियों को जोड़ने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन का संदेश भी दिया गया। भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा सदियों पुरानी है और इसे गुरु-शिष्य परंपरा के जरिए पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया गया है। इस विरासत को बचाने और समृद्ध करने के लिए नियमित आयोजनों, प्रशिक्षण और युवाओं की भागीदारी को जरूरी बताया गया।
आयोजन में यह भी रेखांकित किया गया कि बिहार की अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और संगीत परंपरा रही है, जिसे नई पहचान और मंच देने की जरूरत है।
उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य अतिथियों की मौजूदगी में शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। कहा गया कि ऐसे कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे, ताकि शास्त्रीय संगीत को व्यापक श्रोता वर्ग मिल सके और कलाकारों को प्रोत्साहन।
दुर्गा स्वरोत्सव जैसे आयोजन यह भी याद दिलाते हैं कि संगीत समाज को जोड़ने वाली भाषा है। उत्सव के मौसम में जब शहर भक्ति और उल्लास में डूबा होता है, तब शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां उस माहौल को और गहराई देती हैं। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में शुरू हुआ तीन दिनों का यह महोत्सव पटना के कलाप्रेमियों के लिए सुरों की यात्रा साबित हो सकता है।
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