बिहार MLC चुनाव 2026: भाजपा ने जारी की 4 उम्मीदवारों की सूची,नवल किशोर यादव-एनके यादव सहित पुराने चेहरों पर भरोसा

बिहार विधान परिषद की आठ शिक्षक-स्नातक सीटों के लिए भाजपा ने अपने हिस्से की चार सीटों पर उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पटना शिक्षक से नवल किशोर यादव, कोसी स्नातक से डॉ. एन.के. यादव, दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक से नरेंद्र प्रसाद सिंह को टिकट दिया गया है।

बिहार भाजपा कार्यालय, विधान परिषद चुनाव के लिए घोषित चार उम्मीदवारों की सूची का प्रतीकात्मक चित्र
भाजपा ने बिहार विधान परिषद की शिक्षक-स्नातक सीटों के लिए अपने हिस्से की चार सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया।

उम्मीदवारों की सूची

पटना: बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने हिस्से की चार सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने ज्यादातर मौजूदा और अनुभवी चेहरों पर ही भरोसा जताया है, जिसे राजनीतिक हलकों में जोखिम न लेने और परखे हुए नेताओं पर दांव लगाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

भाजपा की सूची में किसे मिला टिकट

पार्टी की ओर से जारी सूची के अनुसार, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा विधान पार्षद नवल किशोर यादव को एक बार फिर मैदान में उतारा गया है। कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. एन.के. यादव को दोबारा मौका दिया गया है, जो पहले से इस सीट से विधान पार्षद हैं। दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा ने सर्वेश कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया है, जो अब तक निर्दलीय विधान पार्षद के तौर पर इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। वहीं तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नरेंद्र प्रसाद सिंह को उम्मीदवार घोषित किया गया है।

इस तरह भाजपा ने बिहार की आठ शिक्षक-स्नातक सीटों में से अपने हिस्से की चारों सीटों पर तस्वीर साफ कर दी है। शेष चार सीटों पर एनडीए के सहयोगी दलों, खासकर जदयू, के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे, क्योंकि गठबंधन के भीतर इन आठ सीटों पर सीटों का बंटवारा लगभग बराबर-बराबर यानी 50-50 के फॉर्मूले पर तय हुआ बताया जा रहा है।

नवल किशोर यादव: कोसी नहीं, अबकी बार पटना शिक्षक सीट से

पार्टी के अनुभवी नेताओं में शुमार नवल किशोर यादव लंबे समय से बिहार विधान परिषद में भाजपा का चेहरा रहे हैं। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उन्हें दोबारा टिकट मिलना यह दिखाता है कि पार्टी इस सीट पर किसी नए प्रयोग के बजाय स्थापित और परिचित चेहरे के भरोसे मैदान में उतरना चाहती है। शिक्षक वर्ग के मतदाताओं के बीच उनकी पुरानी पकड़ और संगठन में सक्रियता को इस फैसले की बड़ी वजह माना जा रहा है।

डॉ. एन.के. यादव: कोसी स्नातक सीट पर फिर आजमाया गया भरोसा

कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. एन.के. यादव को दोबारा उम्मीदवार बनाया जाना भी इसी रणनीति की एक और मिसाल है। मौजूदा विधान पार्षद के तौर पर वे इस सीट के मतदाताओं, खासकर स्नातक वर्ग के बीच, पहले से सक्रिय रहे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि उनकी पिछली पारी का अनुभव इस बार फिर से जीत की राह आसान बनाएगा।

सर्वेश कुमार: निर्दलीय से अब भाजपा के आधिकारिक प्रत्याशी

दरभंगा स्नातक सीट पर भाजपा का फैसला थोड़ा अलग और दिलचस्प है। यहां से अब तक निर्दलीय विधान पार्षद रहे सर्वेश कुमार को अब पार्टी ने अपना आधिकारिक उम्मीदवार बना दिया है। इसे भाजपा की उस रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें क्षेत्र में पहले से मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं को पार्टी के औपचारिक ढांचे में शामिल कर चुनावी मैदान में उतारा जाता है, ताकि जीत की संभावनाओं को और पुख्ता किया जा सके।

नरेंद्र प्रसाद सिंह: तिरहुत शिक्षक सीट पर नया दांव

तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा ने नरेंद्र प्रसाद सिंह को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट को लेकर पार्टी के भीतर पिछले कुछ समय से मंथन चल रहा था, और आखिरकार पार्टी ने उन्हें इस क्षेत्र से मैदान में उतारने का फैसला किया।

कैसे हुआ नामों पर फैसला

जानकारी के मुताबिक, भाजपा की बिहार कोर कमेटी ने पहले चारों सीटों के लिए संभावित नामों पर विचार-विमर्श किया और फिर इन नामों की सूची पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजी। केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी मिलने के बाद ही औपचारिक रूप से इन उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया गया। यह प्रक्रिया दिखाती है कि प्रदेश इकाई की सिफारिशों के साथ-साथ केंद्रीय नेतृत्व की सहमति को भी उतनी ही अहमियत दी गई है।

आठ सीटों पर चुनाव, एनडीए में आधा-आधा बंटवारा

बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल आठ सीटों पर यह द्विवार्षिक चुनाव हो रहा है। एनडीए गठबंधन के भीतर सीटों का बंटवारा लगभग बराबर के अनुपात में हुआ है, जिसके तहत भाजपा को चार सीटें मिली हैं और शेष चार सीटों पर जदयू अपने उम्मीदवार उतारेगी। यह बंटवारा गठबंधन के भीतर तालमेल और आपसी सहमति की एक और मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर उस दौर में जब राज्य में हाल ही में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए हैं और एनडीए राज्य की सत्ता में है।

इन सीटों के लिए मतगणना 27 अक्टूबर को होनी है, जिसके बाद यह साफ हो जाएगा कि किन उम्मीदवारों को जनता का समर्थन मिला।

शिक्षक और स्नातक सीटों का महत्व क्यों

विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सीटें आम विधानसभा सीटों से अलग प्रकृति की होती हैं। इनमें मतदाता सामान्य जनता नहीं, बल्कि पंजीकृत शिक्षक और स्नातक होते हैं। इस वजह से इन सीटों पर उम्मीदवारों की छवि, शिक्षा और स्नातक वर्ग के मुद्दों से जुड़ाव, तथा शिक्षक संगठनों व पूर्व छात्र नेटवर्क में पकड़ का विशेष महत्व होता है। यही कारण है कि ज्यादातर राजनीतिक दल इन सीटों पर लंबे समय से सक्रिय और क्षेत्र में पहचान रखने वाले नेताओं को ही प्राथमिकता देते हैं, जैसा कि भाजपा की मौजूदा सूची में भी नजर आ रहा है।

आगे की सियासी तस्वीर

भाजपा की सूची जारी होने के बाद अब बाकी दलों पर भी अपने-अपने उम्मीदवार तय करने का दबाव बढ़ेगा। जदयू सहित एनडीए के अन्य घटक दल जल्द अपनी सूची की घोषणा कर सकते हैं। वहीं विपक्षी खेमे से राजद, कांग्रेस और अन्य दलों की रणनीति पर भी सभी की निगाहें रहेंगी। शिक्षक और स्नातक सीटों पर परंपरागत रूप से निर्दलीय और क्षेत्रीय प्रभाव वाले उम्मीदवार भी मजबूती से चुनाव लड़ते रहे हैं, इसलिए इन सीटों पर मुकाबला बहुकोणीय होने की पूरी संभावना है।

फिलहाल भाजपा के लिए चारों सीटों पर पुराने और परखे हुए चेहरों पर भरोसा जताना यह संकेत देता है कि पार्टी इस चुनाव में जोखिम लेने के बजाय स्थिरता और अनुभव को प्राथमिकता दे रही है। आने वाले हफ्तों में चुनाव प्रचार तेज होने के साथ ही यह भी साफ होगा कि पार्टी की यह रणनीति मतदाताओं के बीच कितना असर दिखा पाती है।

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