अजगैबीनाथ धाम और सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं की समीक्षा,10 हजार करोड़ के निवेश से बदलेगी बिहार की हवाई तस्वीर!

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संकल्प सभागार में अजगैबीनाथ धाम एवं सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं की समीक्षा की। दोनों परियोजनाओं में करीब 10 हजार करोड़ रुपये का पीपीपी निवेश होगा, जिससे हवाई कनेक्टिविटी और पर्यटन को गति मिलेगी।

पटना के लोकसेवक भवन स्थित संकल्प सभागार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में अजगैबीनाथ धाम और सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं की समीक्षा बैठक
पटना: संकल्प सभागार में अजगैबीनाथ धाम व सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की फाइल तस्वीर।

पटना, 29 सितंबर। बिहार में हवाई कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया है। राजधानी पटना स्थित लोकसेवक आवास के 'संकल्प' सभागार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में अजगैबीनाथ धाम एवं सोनपुर (सारण) में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजनाओं की प्रस्तुतीकरण एवं समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों परियोजनाओं के टेक्नो-इकोनॉमिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट, ट्रैफिक सर्वे, मास्टर प्लान, भूमि अधिग्रहण, हवाई अड्डे की क्षमता, कनेक्टिविटी और आवश्यक आधारभूत संरचनाओं के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दोनों परियोजनाओं के भूमि अधिग्रहण, कनेक्टिविटी और निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा सभी प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का स्पष्ट निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दोनों एयरपोर्ट परियोजनाओं के विकास से राज्य में हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन, व्यापार एवं क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

दोनों परियोजनाओं में प्रस्तावित निवेश

बैठक में जानकारी दी गई कि अजगैबीनाथ धाम ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के पहले चरण में लगभग 3,500 करोड़ रुपये तथा सोनपुर ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल हवाई अड्डे के पहले चरण में करीब 6,500 करोड़ रुपये का निवेश पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर किया जाना प्रस्तावित है। इस तरह दोनों परियोजनाओं को मिलाकर कुल करीब 10,000 करोड़ रुपये का निवेश होने जा रहा है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भूमि अधिग्रहण तथा कनेक्टिविटी से संबंधित लागत का वहन राज्य सरकार स्वयं करेगी, जबकि निर्माण एवं संचालन का हिस्सा निजी भागीदारों के माध्यम से पूरा किया जाएगा।

बैठक के दौरान भारत सरकार के उपक्रम रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस (RITES Ltd.) के सलाहकारों ने मुख्यमंत्री के समक्ष विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) से संबंधित प्रस्ताव एवं प्रस्तुतीकरण दिया, जिस पर मुख्यमंत्री ने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान

बैठक में बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026 के अंतर्गत दोनों एयरपोर्ट परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं में तेजी लाने तथा सभी आवश्यक कार्यों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने का स्पष्ट निर्देश दिया, ताकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो।

अजगैबीनाथ धाम एयरपोर्ट: सात जिलों को मिलेगा लाभ

अजगैबीनाथ धाम में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के मास्टर प्लान पर बैठक में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि एयरपोर्ट की आधारभूत संरचना और रनवे का विकास इस प्रकार किया जाए कि बड़े विमानों का सुगम संचालन संभव हो सके। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि इस हवाई अड्डे से मुंगेर, लखीसराय, जमुई, भागलपुर, बांका, खगड़िया और बेगूसराय सहित आसपास के कई जिलों को बेहतर हवाई सुविधा का सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही श्रावणी मेले के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन में भी यह एयरपोर्ट बड़ी सुविधा साबित होगा, क्योंकि अजगैबीनाथ धाम क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है।

सोनपुर/सारण एयरपोर्ट: कार्गो सुविधा पर जोर

बैठक में सोनपुर/सारण में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मास्टर प्लान की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस एयरपोर्ट को भी बड़े विमानों के संचालन के अनुकूल विकसित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से कार्गो सुविधा उपलब्ध कराने तथा यात्रियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि यह हवाई अड्डा भविष्य में यात्री एवं माल ढुलाई—दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र बन सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित एयरपोर्ट से बिहार के 22 जिलों के साथ-साथ झारखंड और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों को भी हवाई संपर्क का लाभ मिलने की संभावना है, जिससे यह परियोजना केवल बिहार ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी।

हवाई कनेक्टिविटी से जुड़ेगा व्यापक क्षेत्रीय विकास

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक में स्पष्ट किया कि दोनों एयरपोर्ट परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य में हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन, व्यापार एवं क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने, विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने तथा सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि यह समीक्षा बैठक बिहार सरकार द्वारा हाल के महीनों में शुरू की गई कई बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की श्रृंखला का ही एक हिस्सा है, जिसके तहत राज्य में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप और औद्योगिक क्लस्टर जैसी योजनाओं पर भी समानांतर रूप से काम चल रहा है।

सोनपुर की ऐतिहासिक और आर्थिक पृष्ठभूमि

सोनपुर अपने विश्व प्रसिद्ध पशु मेले के लिए वर्षों से जाना जाता रहा है, और अब इसे एक आधुनिक आर्थिक व पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्थानीय सांसद के साथ बैठक कर सोनपुर क्षेत्र के अगले 50 वर्षों के दीर्घकालिक विकास पर भी व्यापक मंथन किया था, जिसमें ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना पर खास जोर दिया गया था। ऐसे में सोनपुर ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट को क्षेत्र के समग्र विकास की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये दोनों परियोजनाएं

बिहार में फिलहाल पटना, गया, दरभंगा और पूर्णिया जैसे सीमित शहरों में ही हवाई अड्डे की सुविधा उपलब्ध है, जबकि राज्य का बड़ा भौगोलिक क्षेत्र अब भी हवाई संपर्क से वंचित है। ऐसे में अजगैबीनाथ धाम और सोनपुर जैसे नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट राज्य के पूर्वी और मध्य हिस्सों में हवाई कनेक्टिविटी के बड़े अंतर को पाटने में मदद करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल धार्मिक पर्यटन, बल्कि व्यापार, उद्योग और निवेश के अवसरों को भी बड़ा बल मिलेगा। बेहतर हवाई संपर्क से इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को महानगरों और अन्य राज्यों तक पहुंचने में समय व लागत, दोनों की बचत होगी।

पीपीपी मोड पर आधारित यह मॉडल राज्य सरकार के वित्तीय बोझ को कम करते हुए निजी निवेश के माध्यम से तेज गति से बुनियादी ढांचे के विकास को सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है। आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया, डीपीआर अनुमोदन और निर्माण कार्य की प्रगति पर सरकार की करीबी नजर बनी रहेगी, ताकि तय समय-सीमा के भीतर इन्हें धरातल पर उतारा जा सके।

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