2028 तक पूरा होगा मां सीता का भव्य धाम और बोधगया में बनेगा नया कॉरिडोर: लव-कुश मंच से सम्राट चौधरी के बड़े ऐलान"

लव-कुश सम्मान समारोह में सम्राट चौधरी ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने सीतामढ़ी में ₹1000 करोड़ के भव्य सीता मंदिर को 31 दिसंबर 2028 तक पूरा करने की समय-सीमा तय की। साथ ही बोधगया कॉरिडोर, 211 नए कॉलेज और 'विद्यार्थी साथी ऐप' के जरिए शिक्षा सुधारों का खाका पेश किया।

प्रतिभाशाली युवाओं एवं समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली प्रतिभाओं का सम्मान किया गया!
मां सीता के धाम से बोधगया कॉरिडोर तक! सम्राट चौधरी ने लव-कुश सम्मेलन के मंच से बिहार के सांस्कृतिक और शैक्षणिक कायाकल्प का पूरा रोडमैप सामने रखा। जानिए 2028 तक पूरा होने वाले भव्य सीता मंदिर और शिक्षा में आए बड़े बदलावों की पूरी कहानी।

2028 तक पूरा होगा मां सीता का भव्य मंदिर, बोधगया में बनेगा नया कॉरिडोर: लव-कुश समारोह में सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान

पटना — पटना में आयोजित लव-कुश प्रतिभा सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने राज्य के सांस्कृतिक, शैक्षणिक और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं। बिहार की ऐतिहासिक विरासत और आर्थिक प्रगति को रेखांकित करते हुए उन्होंने धार्मिक कॉरिडोर के निर्माण के लिए समय-सीमा तय की और शिक्षा व्यवस्था में किए गए सुधारों का ब्योरा दिया।

सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विकास की घोषणाएं

  • मां सीता मंदिर की समय-सीमा: सम्राट चौधरी ने भरोसा दिलाया कि सीतामढ़ी (पुनौराधाम) में लगभग ₹1,000 करोड़ की लागत से बनने वाला भव्य सीता मंदिर 31 दिसंबर 2028 से पहले बनकर तैयार हो जाएगा।
  • बोधगया कॉरिडोर व वाल्मीकि नगर पार्क: बोधगया में एक भव्य कॉरिडोर के निर्माण की योजना पेश की गई, वहीं वाल्मीकि नगर में ₹60 करोड़ की लागत से लव-कुश पार्क का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
  • ऐतिहासिक विरासत का गौरव: सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक और नालंदा विश्वविद्यालय के स्वर्णिम दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार की धरती ने दुनिया को शासन और सभ्यता का रास्ता दिखाया है।

https://youtu.be/KJryYNcfOQk?si=XJTxr4ovfWAhCnJu

शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्रों के पलायन को रोकने के उद्देश्य से किए गए सुधारों की जानकारी दी गई:

  • नए कॉलेजों व स्कूलों की स्थापना: राज्य में एक साथ 211 नए डिग्री कॉलेज खोले गए हैं और 700 मॉडल स्कूलों का निर्माण किया गया है।
  • कोटा जाने की मजबूरी खत्म: बेहतर बुनियादी ढांचे और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति से कोटा जाने वाले छात्रों व शिक्षकों की घर वापसी हो रही है।
  • रात में पढ़ाई के लिए डिजिटल मदद: विद्यार्थी साथी ऐप के जरिए 77,000 शिक्षकों को जोड़ा गया है, जिससे देर रात 1 बजे पढ़ाई करने वाले 1.42 लाख से अधिक बच्चों को लाइव गाइडेंस मिल रही है।

बजट में वृद्धि और गठबंधन की एकजुटता

बिहार के वित्तीय विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 1990 के दशक के अंत में जहाँ राज्य का बजट महज ₹6,000 करोड़ था, वहीं आज यह ₹2.7 लाख करोड़ के पार पहुँच गया है।
संबोधन के अंत में उन्होंने एनडीए (भाजपा, जदयू, लोजपा, रालोमो और हम) के पांचों घटक दलों की एकजुटता की तुलना "मुट्ठी" से करते हुए राज्य के चौमुखी विकास के लिए मिलकर काम करने का संकल्प दोहराया।

वीडियो में दिए गए सम्राट चौधरी के संबोधन का और अधिक विस्तृत एवं गहराई से विवरण नीचे प्रस्तुत है:

लव-कुश समाज का इतिहास एवं सांस्कृतिक विरासत

  • 1994 की ऐतिहासिक एकजुटता: उन्होंने 1992-1994 के दौरान आयोजित पूर्वी चेतना रैली और कुशवाहा सम्मेलनों का जिक्र किया। इन सम्मेलनों के बाद ही लव-कुश महासम्मेलन का गठन हुआ, जिससे समता पार्टी और बाद में जनता दल (यूनाइटेड) की राजनीतिक नींव मजबूत हुई।
  • रामायण काल का संदर्भ: सम्राट चौधरी ने कहा कि लव और कुश ने मां सीता को न्याय दिलाने के लिए स्वयं भगवान राम और उनकी विशाल सेना से धर्म युद्ध लड़ा था, यह समाज सदा मर्यादा और न्याय के लिए खड़ा रहा है।
  • नालंदा विश्वविद्यालय का महत्व: उन्होंने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में लगभग 90 लाख पुस्तकें थीं। जब आक्रमणकारियों ने इसमें आग लगाई तो उसे पूरी तरह जलने में 6 महीने लग गए थे। उन्होंने यह भी उजागर किया कि प्राचीन नालंदा के खंडर का अभी केवल 30% हिस्सा ही उत्खनित (excavated) हुआ है, जबकि 70% हिस्सा अभी भी जमीन के नीचे बाकी है

बिहार का बजट और वित्तीय सुधार (1999 से वर्तमान)

  • 1999 का दौर: जब सम्राट चौधरी पहली बार 1999 में मंत्री बने थे, तब संयुक्त बिहार का बजट केवल ₹6,000 करोड़ था। उस समय कुल राजस्व का 87% हिस्सा झारखंड क्षेत्र से आता था और बिहार का हिस्सा केवल 13% था।
  • झारखंड विभाजन का समय: जब अटल बिहारी वाजपेयी जी के कार्यकाल में झारखंड अलग राज्य बना, तो तात्कालिक बजटीय घाटे को लेकर विधायकों की आंखों में आंसू थे।
  • 2005 के बाद की आर्थिक छलांग: 2005 में एनडीए सरकार बनने के बाद तत्कालीन वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी के नेतृत्व में बजट ₹23,000 करोड़ पहुंचा।
  • 2024 का वित्त वर्ष: 2024 में बिहार का बजट ₹2.7 लाख करोड़ से अधिक हो गया, जो राज्य के मजबूत आर्थिक ढांचागत बदलाव को दिखाता है।

शिक्षा में क्रांतिकारी योजनाएँ एवं 'कोटा मॉडल' की समाप्ति

  • उच्च शिक्षा का विस्तार: एक ही दिन (15 जुलाई) में राज्यभर में 211 नए डिग्री कॉलेज खोलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया!
  • विद्यार्थी साथी ऐप (Vidyarthi Sathi App):
    • देर रात (1:00 बजे से 1:30 बजे) पढ़ाई करने वाले छात्रों को तुरंत ऑनलाइन गाइडेंस देने के लिए 77,000 योग्य शिक्षकों को इस ऐप से जोड़ा गया है।
    • अब तक 1.42 लाख से अधिक छात्रों ने देर रात इस ऐप के जरिए शिक्षकों की सहायता प्राप्त की है!
  • कोटा से वापसी: राज्य में 700 मॉडल स्कूल और मां सरस्वती विद्या निकेतन जैसी सुविधाएं खड़ी की गई हैं, जिससे कोटा पढ़ने गए छात्र और पढ़ाने गए शिक्षक वापस बिहार लौट रहे हैं।

धार्मिक व पर्यटन कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स

  • सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर: पटना स्थित अशोक कन्वेंशन सेंटर परिसर का नामकरण अपने नगर विकास मंत्रित्व काल (2012-13) में कराने की बात याद दिलाई।
  • वाल्मीकि नगर लव-कुश पार्क: वाल्मीकि नगर में जहाँ भगवान लव-कुश का जन्मस्थान माना जाता है, वहाँ ₹60 करोड़ की लागत से पर्यटन पार्क का निर्माण किया जा रहा है।
  • पुनौराधाम (सीतामढ़ी): गृह मंत्री अमित शाह और तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा रखी गई आधारशिला के तहत ₹1,000 करोड़ का भव्य सीता मंदिर परिसर 31 दिसंबर 2028 से पहले बनाकर राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा ।

  5-दलीय गठबंधन की राजनीतिक रणनीति

  • 2010 बनाम 2020 का चुनाव: 2010 में एकजुट होकर चुनाव लड़ने पर 206 सीटें आई थीं, जबकि 2020 में कुछ बिखराव के कारण सीटें घटकर 127 रह गईं।
  • मुट्ठी की ताकत (2025/आगे का लक्ष्य): भाजपा (BJP), जदयू (JDU), लोजपा (LJP), राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM)—इन पांचों सहयोगियों की तुलना हाथ की पांच उंगलियों से की। उन्होंने कहा कि अलग-अलग उंगलियां भले ही असमान हों, लेकिन जब वे एकजुट होकर "मुट्ठी" बनती हैं, तो वह अटूट शक्ति का प्रतीक बन जाती हैं।

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